किसी ने भ्रष्टाचार विरोधी तो किसी ने कहा सत्ताभोगी

किशनगंज : इस्तीफा देने के चंद घंटों बाद ही नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार की सत्ता संभाल ली है. शुक्रवार को विश्वास मत भी हासिल भी कर लिया. इस बार जेडीयू को आरजेडी की जगह बीजेपी का समर्थन मिला हुआ है और उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर एक बार फिर सुशील मोदी विराजमान […]

किशनगंज : इस्तीफा देने के चंद घंटों बाद ही नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार की सत्ता संभाल ली है. शुक्रवार को विश्वास मत भी हासिल भी कर लिया. इस बार जेडीयू को आरजेडी की जगह बीजेपी का समर्थन मिला हुआ है और उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर एक बार फिर सुशील मोदी विराजमान हुए हैं. इस मौके पर ‘प्रभात खबर’ ने कुछ राजनेताओं से उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की. एक ओर जहां कांग्रेस विधायक तौसीफ आलम ने इशारा किया कि नीतीश ने जो किया सही नहीं किया वहीं दूसरी ओर जेडीयू नेता के प्रो बुलंद अखतर हाशमी ने राहुल गांधी के बयान की निंदा की.

जनादेश का अपमान
बहादुरगंज के कांग्रेस विधायक तौसीफ आलम ने कहा, नीतीश जी मुख्यमंत्री बन गए हैं, बधाई हो. लेकिन, जनता ने बीजेपी के खिलाफ वोट दिया था, तीन चौथाई बहुमत दिया था महागठबंधन को, अब इसमें कोई टूट कर चला जाए तो जनता को बुरा लगेगा. नीतीश के इस्तीफे पर टिप्पणी पर करते हुए तौसीफ ने कहा, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में कोई भी मुख्यमंत्री तमाम दूसरे कदम उठा सकता है, खुद अपना इस्तीफा थोड़े ही देता है. कांग्रेस के पक्ष पर बोलते हुए उन्होंने कहा, कांग्रेस अपने तरीके से विपक्ष में रहकर जनहित के लिए लड़ाई लड़ती रहेगी. अपने सिद्धांतों पर पूरी तरीके से कायम रहेगी. कांग्रेस का अपना एक आधार है. लालू जी के साथ हमलोग बने हुए हैं, वह महागठबंधन अभी भी बना हुआ है, अभी नहीं टूटा है.
भ्रष्टाचार से समझौता नहीं : प्रो बुलंद
जदयू के वरिष्ठ नेता प्रो बुलंद अख्तर हाशमी ने कहा कि राजनीति में जो बड़े नेता होते हैं उनको परसेप्शन की लड़ाई लड़नी होती है. तेजस्वी यादव को अपने ऊपर लगे आरोपों पर अपनी स्थिति जनता में स्पष्ट करनी चाहिए थी जो उन्होंने नहीं किया. हमने भ्रष्टाचार से समझौता करने से इनकार कर दिया. हां हमने बिहार की जनता से स्वच्छ प्रशासन का वादा किया था और हम उस पर टिके हुए हैं.
सत्ता भोगी हैं नीतीश: बागी
बिहार की राजनीतिक उठापटक पर बोलते हुए राजद के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री इस्लामुद्दीन बागी ने कहा, इस नाटक के दोनों खलनायक नीतीश और बीजेपी हैं. ये सत्ता के भोगी हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुजफ्फरपुर में नीतीश के डीएनए को गड़बड़ कहा था. अब ये साबित हो गया है कि दोनों का डीएनए एक है.
अवसरवादिता, सत्ता की भूख दोनों पार्टियों का डीएनए है. इस गठबंधन में भी तीनों दलों की सहमति थी, जदयू से ज्यादा विधायक होने के बावजूद राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने नीतीश को सीएम बनने अवसर प्रदान किया. सत्ताभोगी जेडीयू और अवसरवादी भाजपा एक साथ हो गई. नीतीश आयाराम गयाराम की सियासत कर रहे हैं. जदयू और बीजेपी की सरकार को एक दिन भी सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं.

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