समाज में समानता स्थापित करने के लिए महिलाओं का आत्मनिर्भरता होना जरूरी: प्राचार्य
समाज में समानता स्थापित करने के लिए महिलाओं का आत्मनिर्भरता होना जरूरी: प्राचार्य
खगड़िया. स्थानीय राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय के कला व सांस्कृतिक क्लब द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया गया. इस अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. शनिवार को संगोष्ठी का विषय क्या मैं आत्म-जागरूक हूं रखा गया, जिसमें महाविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और समाज में महिलाओं की भूमिका को लेकर जागरूकता फैलाना था. कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ मणि भूषण द्वारा किया गया. उन्होंने आत्म-जागरूकता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आत्म-जागरूक व्यक्ति ही अपने जीवन में सही निर्णय ले सकता है. समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है. महिलाओं के लिए आत्म-जागरूकता न केवल आत्मनिर्भरता की ओर कदम है. बल्कि यह समाज में समानता स्थापित करने का भी एक प्रभावी साधन है. संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. वैभव विशाल ( विद्युत अभियंत्रण विभाग) ने आत्म-जागरूकता के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि आत्म-जागरूक व्यक्ति अपने निर्णयों में आत्मनिर्भर होता है. समाज में भी सकारात्मक योगदान देता है. प्रो रजनी कुमारी (विद्युत अभियंत्रण विभाग) ने महिलाओं के आत्म-सशक्तिकरण पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्म-जागरूक होकर अपने अधिकारों, कर्तव्यों और समाज में अपनी भूमिका को समझना चाहिए. जब महिलाएं आत्म-जागरूक होती हैं, तो वे अपने जीवन के हर क्षेत्र में मजबूती से आगे बढ़ सकती हैं. प्रो. प्रियंका सिन्हा (विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस) ने आत्म-जागरूकता को व्यक्ति और व्यावसायिक जीवन में सफलता की कुंजी बताया. उन्होंने छात्राओं को प्रोत्साहित किया कि वे आत्म-विश्लेषण करें, अपनी क्षमताओं को पहचानें और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं. कार्यक्रम के दौरान कई विद्यार्थियों ने भी विचार साझा किया. उन्होंने आत्म-जागरूकता से जुड़े अनुभवों और चुनौतियों की चर्चा की. छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण पर राय रखी. संगोष्ठी के अंत में आर्ट एंड कल्चरल क्लब के नोडल अधिकारी प्रो. अभिषेक कुमार, प्रो. अविरल कुमार ने सभी प्रतिभागियों, मुख्य वक्ताओं और आयोजन समिति के सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया. इस प्रकार के आयोजनों की महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रो. अभिषेक कुमार ने कहा कि आत्म-जागरूकता केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है.
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