सरसों तेल, रिफाइन, बासमती चावल सहित खाद्य सामग्री की दामों में अप्रत्याशित वृद्धि

धारा सरसों तेल 2350 से बढ़कर 2550 रुपये प्रति टिन हो गया है. रिफाइन तेल में तो अजब खेला दिखाई पड़ने लगा है.

गोगरी. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव की तपिश अब सीधे रसोई तक पहुंचने लगी है. एक पखवाड़े के दौरान सरसों तेल, रिफाइन, दाल और चावल सहित अन्य खाद्यान्न सामग्री के दामों में काफी उछाल आया है. नतीजतन आम आदमी की थाली अब काफी महंगी हो गयी है. हैरानी है कि स्थानीय स्तर पर कोई बड़ा संकट नहीं हैं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय माहौल और ईंधन लागत का हवाला देकर पहले ही कीमतें बढ़ा दी गयी. आपदा में अवसर तलाशने के कारण न सिर्फ उपभोक्ताओं का बजट बिगड़ा है, बल्कि छोटे कारोबारियों का गणित भी गड़बड़ा गया है. सबसे ज्यादा असर चावल, सरसों तेल, रिफाइन, दालों पर देखने को मिल रहा है. रहड़ दाल एक पखवाड़े पूर्व 115 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 120 रुपये किलो हो गयी, यानी करीब 5 फीसदी का इजाफा हुआ. वहीं मसूर दाल 75 रुपये से बढ़ कर 80 रुपये, गोटा धनिया 110 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 150 रुपये किलो तक पहुंच गया है. जबकि जीरा 260 किलो से बढ़कर 280 किलो हो गया है. इसके अलावे कल्याण सरसों तेल 25 सौ रुपये टीना से बढ़कर 2750 रुपये तक पहुंच गया है. वहीं धारा सरसों तेल 2350 से बढ़कर 2550 रुपये प्रति टिन हो गया है. रिफाइन तेल में तो अजब खेला दिखाई पड़ने लगा है. पहले एक किलो की पॉकेट बाजार में उपलब्ध रहती थी, अब 750 ग्राम की पॉकेट का दाम 150 रुपये हो गया है, जबकि पूर्व में 135 रुपये में बाजार में उपलब्ध होती थी. शहर के खुदरा किराना दुकानदारों ने बताया कि थोक बाजार में लगातार तेजी का माहौल बना हुआ है. 10 से 15 फीसदी तक बढ़े बासमती चावल के भाव चावल के दामों में तो और ज्यादा उछाल देखने को मिला है. इंडिया गेट बासमती चावल एक पखवाड़े पूर्व में सौ रुपये से बढ़कर 110 रुपये किलो पहुंच गया. करीब 10 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी से झटका लगा है. वहीं आमतौर पर घर में इस्तेमाल होने वाला बासमती चावल भी 58 से बढ़कर 65 रुपये किलो हो गया. यानी एक पखवाड़े में करीब 10 फीसदी महंगा हुआ. इससे घरों की रसोई का संतुलन बिगड़ गया है. इस संबंध में थोक कारोबारी योगेश कुमार ने बताया कि पंजाब और मध्य प्रदेश से आने वाले खाद्यान्न के दाम अचानक बढ़ना समझ से परे है. अबतक न तो उत्पादन में कोई बड़ी कमी आई है और न ही परिवहन में कोई ऐसा संकट है. इसके बावजूद डीजल-पेट्रोल के महंगे होने और अंतरराष्ट्रीय तनाव का हवाला देकर सप्लाई से पहले ही दाम बढ़ा दिए गए हैं. जिसके कारण बाजारों में खाद्यान्न सामग्री के दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है.

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By RAJKISHORE SINGH

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