बाबा फुलेश्वर नाथ मंदिर की जमीन और व्यवस्था को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगी जांच

बेलदौर के ऐतिहासिक बाबा फुलेश्वर नाथ मंदिर की भूमि और व्यवस्था को लेकर विवाद गहरा गया है. ग्रामीण व शिवभक्त मंदिर के बेहतर संचालन व संरक्षण के लिए पारदर्शी प्रबंधन समिति के गठन की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों ने मुखिया प्रतिनिधि पर मंदिर की भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगाया है और जल्द समिति गठित न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.

बेलदौर (खगड़िया) : प्रखंड क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर बाबा फुलेश्वर नाथ मंदिर की भूमि और व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. मंदिर के बेहतर संचालन और संरक्षण की मांग को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और शिवभक्तों में नाराजगी है. सैकड़ों ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर स्थानीय प्रशासन और बेलदौर थाना तक भेजकर मंदिर के संरक्षण एवं सुव्यवस्थित संचालन की मांग की है.

मुखिया प्रतिनिधि पर ग्रामीणों ने लगाया आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि बोबिल पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि संजय कुमार सिंह अपने गांव के कुछ लोगों के साथ मिलकर मंदिर की भूमि और व्यवस्था पर कब्जा करने की नीयत से एक टीम का गठन कर चुके हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

ग्रामीणों ने मंदिर के बेहतर संचालन, संरक्षण और विकास के लिए अविलंब प्रखंड स्तर पर पारदर्शी प्रबंधन समिति गठित करने की मांग की है.

पूरे बेलदौर की साझा धार्मिक धरोहर बताया

शिवभक्तों का कहना है कि बाबा फुलेश्वर नाथ मंदिर किसी एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बेलदौर प्रखंड की साझा धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है. यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि मंदिर परिसर में लगे हरे-भरे पेड़ों को कटवाने का प्रयास किया जा रहा है. उनका कहना है कि इससे मंदिर परिसर की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण प्रभावित होने की आशंका है.

मंदिर की भूमि और संपत्ति की जांच की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर की भूमि, संपत्ति और वर्तमान व्यवस्था की जांच कराने के साथ मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही मंदिर के संचालन के लिए पारदर्शी प्रबंधन व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है.

ग्रामीणों और शिवभक्तों ने कहा है कि यदि जल्द प्रबंधन समिति गठित कर मंदिर के संरक्षण और विकास की दिशा में ठोस पहल नहीं की गयी, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे.

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By Amit kumar singh

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