गोगरी. धनतेरस और दीपावली को लेकर बाजार व दुकानें सजने लगी है. धनतेरस 19 अक्तूबर व दीपावली 21 अक्तूबर को है. धनतेरस को लेकर बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कपड़े की दुकानों में चहल-पहल बढ़ने लगी है. दीपावली को लेकर खासकर कपड़े की दुकानों में रौनक बढ़ने लगी है. वहीं ज्वेलरी दुकानों में डिमांड पहुंचने लगी है. बाजार में रौनक बढ़ने लगी है. कॉस्मेटिक्स दुकानों में भी दीपावली को लेकर चहल-पहल बढ़ने लगी है. अभी से ही लोग दीपावली की तैयारी में जुट गये हैं. वहीं इस बार कारोबारियों को भी अच्छी खासी बिक्री की उम्मीद है. इसको ध्यान में रखकर नये नये लुक के आकर्षक डिजाईनों के सामान बाजार में उपलब्ध है. पिछले साल की तुलना इस बार लोगों का झुकाव स्वदेशी सामान की ओर अधिक दिख रहा है. दीपों के त्योहार को लेकर दीये व मोमबत्ती आदि की खरीदारी पर ध्यान दिया जायेगा, ताकि स्वदेशी सामान को बढ़ावा दिया जा सके. खासकर युवाओं की मानें तो, इस बार चाईनीज झालरों के जगह मिट्टी के दीये और मोमबती का प्रयोग अधिक किये जाने की तैयारी है, ताकि स्वदेशी सामानों के निर्माण से जुड़े कामगारों की दिवाली अच्छी तरह से मन सके. जानकारों की मानें, तो जिले में हर साल चाईनीज झालर आदि के तकरीबन 50 से 60 लाख रुपये का कारोबार होता है. वहीं इलेक्ट्रानिक्स झालर, बाइक आदि की बात करें तो करीब एक करोड़ से अधिक रुपये का कारोबार होता है. बताते चलें कि पिछले कुछ वर्षों की बात करें तो मिट्टी के दीये के जगह चाईनीज झालरों ने ले लिया है. मिट्टी के दीये की जगह लोग चाईनीज झालरों का इस्तेमाल करने लगे हैं. मिट्टी के दीये बनाने के रोजगार से जुड़े लक्ष्मण पंडित बताते हैं पहले जिले में मिट्टी के दीये का लाखों का कारोबार होता था, लेकिन अब मार्केट में वैसी रौनक नहीं रही. हालांकि इसकी भरपाई के लिये जिले में अलग-अलग जगहों पर छोटे मोमबत्ती, अगरबत्ती, कैंडिल आदि फैक्ट्रियां खुल जाने से आसानी से स्वदेशी सामान उपलब्ध हो जाते हैं और इससे जुड़े सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
