बेलदौर का इकलौता खेल मैदान बचाने सड़क पर उतरे लोग, स्विमिंग पूल योजना के विरोध में तेज हुआ आंदोलन

Khagaria News: नगर पंचायत बेलदौर और आसपास के क्षेत्रों का एकमात्र बड़ा सार्वजनिक खेल मैदान इन दिनों अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है. गांधी इंटर विद्यालय परिसर स्थित इस मैदान में निर्माणाधीन इंडोर स्टेडियम के साथ स्विमिंग पूल निर्माण की प्रस्तावित योजना को लेकर स्थानीय लोगों, खिलाड़ियों और समाजसेवियों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है.

Khagaria News: बेलदौर का गांधी इंटर विद्यालय मैदान इन दिनों खेल प्रतियोगिताओं का नहीं, बल्कि जन आंदोलन का केंद्र बना हुआ है. इंडोर स्टेडियम निर्माण से खुश स्थानीय लोगों में उस समय नाराजगी फैल गई, जब इसी परिसर में स्विमिंग पूल बनाने की प्रस्तावित योजना की जानकारी सामने आई. लोगों का कहना है कि इससे क्षेत्र का एकमात्र बड़ा खेल मैदान खत्म हो जाएगा. विरोध में आमरण अनशन से लेकर बाजार बंद और चक्का जाम तक की नौबत आ गई है.

आखिर क्यों भड़का लोगों का गुस्सा

स्थानीय लोगों का कहना है कि इंडोर स्टेडियम निर्माण को लेकर क्षेत्र में उत्साह था, लेकिन जब मैदान परिसर में मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत स्विमिंग पूल निर्माण की चर्चा सामने आई तो विरोध शुरू हो गया. लोगों को आशंका है कि स्विमिंग पूल बनने से खेल मैदान का बड़ा हिस्सा समाप्त हो जाएगा और सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध खुला मैदान सिमट जाएगा.

लोगों का तर्क है कि बेलदौर में यह मैदान सिर्फ खेल गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक आयोजनों का भी प्रमुख स्थल रहा है.

आमरण अनशन से सड़क तक पहुंचा आंदोलन

खेल मैदान बचाने की मांग को लेकर पूर्व मुखिया संजय शर्मा ने “खेल मैदान बचाओ अभियान” शुरू किया है. घोषित कार्यक्रम के तहत उन्होंने दो जून से मैदान परिसर में आमरण अनशन शुरू कर दिया.

धीरे-धीरे इस आंदोलन को खिलाड़ियों, समाजसेवियों, विभिन्न राजनीतिक दलों और आम नागरिकों का समर्थन मिलने लगा. आंदोलन के समर्थन में बाजार बंद और चक्का जाम जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिससे मामला और गर्मा गया.

आंदोलनकारियों पर दर्ज हुई प्राथमिकी

स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया. विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने अनशन समाप्त कराने का प्रयास किया. वहीं आंदोलन के दौरान हुए बाजार बंद और चक्का जाम को लेकर अनशनकारी समेत 11 नामजद और दो दर्जन से अधिक अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई.

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है.

योजना में बदलाव पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने क्षेत्र को आधुनिक इंडोर स्टेडियम की सौगात दी थी, तो निर्माण कार्य आधा पूरा होने के बाद योजना में बदलाव क्यों किया गया.

ग्रामीणों का मानना है कि स्विमिंग पूल की तुलना में इंडोर स्टेडियम और खुला खेल मैदान अधिक लोगों के उपयोग में आता है. यही वजह है कि अब लोग सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे को उठाने की तैयारी कर रहे हैं.

प्रशासन और विभाग के सामने बढ़ी चुनौती

विभागीय नक्शा सामने आने के बाद विरोध और तेज हो गया है. बड़ी संख्या में लोग अब स्विमिंग पूल निर्माण के विरोध और इंडोर स्टेडियम निर्माण को पूरा कराने की मांग को लेकर एकजुट हो रहे हैं.

ऐसे में आंदोलनकारियों को शांत कराते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना प्रशासन और संबंधित विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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