खेत में मौसम की मार, मंडी में दाम की चोट, संकट में खगड़िया के मक्का किसान

Khagaria Farmers Crisis: पहले आंधी-बारिश ने खेतों में खड़ी फसल गिरा दी. फिर जब बची हुई उपज मंडी पहुंची तो कीमतों ने किसानों की उम्मीद तोड़ दी. खगड़िया के गोगरी में मक्का किसान दोहरी मार झेल रहे हैं. आंधी-बारिश से उत्पादन घटा और बाजार में केवल 1850 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिलने से किसान आर्थिक संकट में फंस गए

खगड़िया के गोगरी से रणवीर झा की रिपोर्ट.

Khagaria Farmers Crisis: गोगरी प्रखंड और आसपास के इलाकों में मक्का किसानों के लिए यह सीजन भारी मुश्किलों भरा साबित हो रहा है. एक ओर मौसम की बेरुखी ने उत्पादन घटा दिया, वहीं दूसरी ओर बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं. हालात ऐसे हैं कि किसान अपनी मक्का की उपज महज 1850 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचने को मजबूर हैं. किसानों का कहना है कि इस कीमत पर खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है.

आंधी-बारिश ने खेतों में मचाई तबाही

किसानों के अनुसार इस वर्ष मक्का की फसल शुरुआत में काफी अच्छी दिख रही थी. बेहतर उत्पादन की उम्मीद भी थी. लेकिन बाली निकलने के दौरान कई बार आई तेज आंधी और बारिश ने खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचाया. बड़ी संख्या में पौधे जमीन पर गिर गए, जिससे दानों का विकास प्रभावित हुआ और पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की गई.

कई किसानों का कहना है कि जहां प्रति एकड़ 35 से 40 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद थी, वहां अब महज 20 से 25 क्विंटल उपज ही मिल पाई है.

बढ़ती लागत ने बिगाड़ा खेती का गणित

मक्का की खेती पहले से कहीं अधिक महंगी हो गई है. उन्नत बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर किसानों का खर्च लगातार बढ़ा है. डीजल की बढ़ती कीमतों ने सिंचाई लागत को और बढ़ा दिया है.

स्थानीय किसानों के मुताबिक एक एकड़ मक्का की खेती में 25 से 30 हजार रुपये तक खर्च हो जाता है. ऐसे में कम उत्पादन और कम बाजार भाव ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.

1850 रुपये क्विंटल के भाव ने बढ़ाई चिंता

फसल तैयार होने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि उत्पादन घटने के कारण बाजार में बेहतर कीमत मिलेगी. लेकिन स्थानीय मंडियों में मक्का का भाव 1850 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गया है.

किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद व्यवस्था प्रभावी नहीं होने के कारण व्यापारी मनमाने दाम पर खरीदारी कर रहे हैं. भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से किसान अपनी उपज रोक भी नहीं पा रहे हैं और मजबूरी में कम कीमत पर बेच रहे हैं.

किसानों ने सरकार से लगाई गुहार

क्षेत्र के किसानों ने सरकार से मक्का का लाभकारी समर्थन मूल्य तय करने, सरकारी खरीद केंद्र खोलने और मौसम से हुई फसल क्षति का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है. किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में मक्का की खेती से लोगों का मोहभंग हो सकता है.

खेत से मंडी तक संघर्ष की कहानी

गोगरी के किसानों की जुबान पर आज एक ही सवाल है कि आखिर मौसम, लागत और बाजार तीनों की मार झेलने के बाद किसान कैसे टिकेगा. यह केवल मक्का के घटते दाम की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण कृषि व्यवस्था के सामने खड़ी बड़ी चुनौती का संकेत भी है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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