Khagaria Road Projects: खगड़िया जिले के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से जर्जर सड़कों से परेशान लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है. सदर विधायक बबलू कुमार मंडल की पहल के बाद जिले में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से पांच महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हो गयी है.
ग्रामीण कार्य विभाग ने इन सभी सड़कों का डीपीआर तैयार कर तकनीकी स्वीकृति के लिए विभाग को भेज दिया है. अब इन योजनाओं के लिए तकनीकी मंजूरी मिलने का इंतजार है. स्वीकृति मिलते ही निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है.
इन सड़कों के निर्माण से सदर प्रखंड और मानसी प्रखंड के कई ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी. गांवों से बाजार, स्कूल, अस्पताल और मुख्य सड़कों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है.
पांच सड़कों से कई गांवों को मिलेगी राहत
ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव में सदर और मानसी प्रखंड की पांच महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं शामिल हैं. इन सड़कों के निर्माण पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
सड़कें बनने के बाद ग्रामीणों को जर्जर मार्गों से राहत मिलने के साथ ही दैनिक आवागमन में भी सुविधा होगी. किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने, विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने और मजदूरों को रोजगार स्थल तक पहुंचने में आसानी हो सकती है.
भदास पंचवटी चौक से बछौता तक 1.30 करोड़ की सड़क
सदर प्रखंड में भदास पंचवटी चौक से बछौता तक सड़क निर्माण की योजना तैयार की गयी है. इसके लिए करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपये का डीपीआर बनाया गया है.
यह सड़क ग्रामीण क्षेत्र को मुख्य मार्ग से जोड़ने में महत्वपूर्ण होगी. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सड़क बनने के बाद आवागमन की परेशानी काफी कम होगी.
त्रिभुवन टोला-सौराय डीह सड़क पर खर्च होंगे 5.02 करोड़
सबसे बड़ी परियोजनाओं में बखरी-खगड़िया पथ से त्रिभुवन टोला भाया सौराय डीह तक सड़क निर्माण शामिल है. इस सड़क के लिए करीब 5 करोड़ 2 लाख रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है.
यह मार्ग कई ग्रामीण इलाकों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क सड़क बन सकता है. सड़क बनने के बाद ग्रामीणों की बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है.
मथार पूर्वी टोला की सड़क पर 1.83 करोड़ का प्रस्ताव
मथार पंचायत में पंचायत भवन से मथार पूर्वी टोला तक सड़क निर्माण की योजना भी प्रस्तावित है. इसके लिए करीब 1 करोड़ 83 लाख रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है.
स्थानीय स्तर पर इस सड़क की मांग लंबे समय से की जा रही थी. निर्माण पूरा होने के बाद पंचायत के अंदरूनी इलाकों में रहने वाले लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है.
मानसी में दो सड़कों को भी मिली योजना में जगह
मानसी प्रखंड क्षेत्र की दो सड़क परियोजनाओं को भी इस प्रस्ताव में शामिल किया गया है.
एनएच-31 बजरंगबली चौक से चुकती मानसी होते हुए आरईओ पथ तक सड़क के निर्माण के लिए करीब 2 करोड़ 59 लाख रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है.
इसके अलावा चुकती मानसी रोड से भाया स्वर्गीय जगदेव यादव के घर, राजाजान, वासुदेव प्रसाद के घर होते हुए वाटर वेज बांध तक पीसीसी सड़क निर्माण की योजना है. इस सड़क पर करीब 1 करोड़ 24 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है.
पीसीसी सड़क बनने से खासकर बरसात के दौरान स्थानीय लोगों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है.
तकनीकी स्वीकृति के बाद आगे बढ़ेगा निर्माण
फिलहाल इन सभी योजनाओं की सबसे अहम कड़ी तकनीकी स्वीकृति है. ग्रामीण कार्य विभाग ने डीपीआर तैयार कर इसे विभाग को भेज दिया है. अब तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण से जुड़ी अगली प्रक्रिया शुरू होगी.
यानी ग्रामीणों को सड़क निर्माण के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि डीपीआर तैयार होकर विभाग को भेजे जाने से वर्षों से चली आ रही मांगों के पूरा होने की उम्मीद जरूर बढ़ी है.
सड़क बनने से किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा
इन प्रस्तावित सड़कों का असर सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं रहेगा. ग्रामीण इलाकों में सड़क बेहतर होने से किसानों को कृषि उपज बाजार तक ले जाने में सुविधा होगी. विद्यार्थियों के लिए स्कूल-कॉलेज पहुंचना आसान होगा. मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी समय कम लग सकता है.
इसके अलावा ग्रामीण कारोबार और स्थानीय बाजारों को भी बेहतर सड़क संपर्क का फायदा मिलने की उम्मीद है. खराब सड़क के कारण बरसात में जिन इलाकों में आवागमन प्रभावित होता है, वहां पीसीसी और पक्की सड़क बनने से स्थिति में सुधार हो सकता है.
Khagaria Road Projects: विधायक की पहल के बाद तेज हुई प्रक्रिया
इन सड़क योजनाओं को आगे बढ़ाने में सदर विधायक बबलू कुमार मंडल की पहल को अहम बताया गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण की मांगों के बाद विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ायी गयी और अब पांच परियोजनाओं का डीपीआर तैयार कर तकनीकी स्वीकृति के लिए भेजा गया है.
अब प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने इन योजनाओं को समय पर तकनीकी स्वीकृति दिलाकर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी. ग्रामीणों की नजर भी इसी पर है कि कागज पर तैयार हुई ये योजनाएं कब जमीन पर उतरती हैं.
