चौथम प्रखंड अंतर्गत देवका गांव स्थित राम-जानकी मंदिर परिसर में कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव एवं मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. जन्माष्टमी को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है. मंदिर परिसर में सजावट का काम तेजी से चल रहा है, जबकि कलाकार भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं. मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं.
प्रतिमा पूजा से शुरू हुआ था आयोजन, अब बन गया भव्य मेला
बताया जाता है कि देवका गांव में कई वर्ष पहले जन्माष्टमी के अवसर पर केवल भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती थी. पूजा के बाद प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता था. उस समय यहां मेले का आयोजन नहीं होता था.
बाद में गांव के उत्साही युवाओं ने जन्माष्टमी के आयोजन को मेले का स्वरूप देने की पहल की. राजीव झा, गौरी झा, राजीव भगत, दिलीप साह, स्वर्गीय खलठू बाबा, प्रमोद सिंह, कैलू सरपंच, बिलयन साह और गरीब मुंशी सहित अन्य ग्रामीणों के प्रयास से आयोजन धीरे-धीरे भव्य मेले में बदल गया.
धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
इसी परंपरा के तहत इस वर्ष भी चार सितंबर की रात कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का भव्य आयोजन किया जायेगा. इसके बाद पांच और नौ सितंबर की रात तथा छह सितंबर की रात सांस्कृतिक एवं नाट्य कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे.
छह सितंबर की रात ‘घुंघरू’ और ‘समर्पण’ नाटक का मंचन किया जायेगा. वहीं सात सितंबर को नाट्य कला परिषद की ओर से जागरण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा. धार्मिक आयोजन के साथ लगातार होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले का मुख्य आकर्षण रहेंगे.
युवाओं ने संभाली मेले की कमान
जन्माष्टमी महोत्सव को सफल बनाने के लिए गांव के युवा और ग्रामीण लगातार जुटे हुए हैं. मंदिर परिसर की सजावट से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है. आयोजन स्थल पर आने वाले लोगों की भीड़ को देखते हुए आवश्यक इंतजाम भी किये जा रहे हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि देवका का कृष्ण जन्माष्टमी मेला अब गांव की पहचान बन चुका है. हर वर्ष आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग यहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव देखने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने पहुंचते हैं.
इस बार भी आयोजकों को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है. मंदिर परिसर में तैयारियां अंतिम दौर में हैं और जन्माष्टमी की रात देवका में भक्ति के साथ सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिलेगा.
