कांवरिया पथ: 35 वर्षों से सेवा की मिसाल बना बेलदौर-खगड़िया सेवा शिविर, जड़ी-बूटी की चाय से दूर होती है डाक बमों की थकान

35 वर्षों से अधिक समय से, बेलदौर-खगड़िया सेवा शिविर श्रावणी मेला के दौरान लाखों शिवभक्तों की सेवा कर रहा है. यह शिविर डाक बमों के लिए विशेष जड़ी-बूटी की चाय और मालिश की व्यवस्था करता है, जिससे उनकी कठिन यात्रा आसान हो जाती है.

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला में सुल्तानगंज से बाबा धाम (देवघर) जाने वाले लाखों शिवभक्तों की सेवा में 'बेलदौर-खगड़िया सेवा शिविर' पिछले 35 वर्षों से अनवरत आस्था, सेवा और समर्पण का अनुपम केंद्र बना हुआ है. सुल्तानगंज-देवघर कांवरिया मार्ग पर कुमरसार से लगभग दो किलोमीटर आगे जयनगर जोड़ीपार स्थित बमकाली मंदिर के पास संचालित यह शिविर कांवरियों के बीच अपनी खास व्यवस्था के लिए जाना जाता है. खासकर, यहां पिलाई जाने वाली विशेष जड़ी-बूटी की चाय डाक बमों की भारी शारीरिक थकान मिटाने में बेहद असरदार साबित हो रही है.

जड़ी-बूटी की चाय और मालिश बनी डाक बमों का सहारा

सावन के महीने में प्रत्येक सोमवारी को बाबा भोलेनाथ पर जल चढ़ाने के लिए सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बिना रुके 100 से अधिक किलोमीटर की पैदल यात्रा करने वाले 'डाक बम' रविवार को जब इस मार्ग से गुजरते हैं, तो यह शिविर उनके लिए बड़ी राहत बनता है.

  • विशेष हर्बल चाय: कई आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी-बूटियों से तैयार की गई गर्म चाय डाक बमों को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है.
  • राहत व पोषण: थकान से चूर पदयात्रियों को चलते-चलते मालिश, एक्यूप्रेशर, दर्द निवारक दवाइयां, एनर्जी ड्रिंक्स और ड्राई फ्रूट्स उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे उनका हौसला बना रहता है.

सामान्य कांवरियों के लिए विश्राम और भोजन के पुख्ता इंतजाम

सामान्य कांवरियों के लिए भी शिविर में चौबीसों घंटे निशुल्क सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. शिविर में ठहरने के लिए सुरक्षित विश्राम स्थल, स्वच्छ पेयजल, गर्म व ताजा भोजन, नाश्ता, प्राथमिक चिकित्सा और पैरों की मालिश की पूरी व्यवस्था रहती है. युवा स्वयंसेवकों की टोली भक्ति गीतों और बोल-बम के जयकारों के बीच दिन-रात सेवा में जुटी रहती है, जिससे कांवरिया तरोताजा होकर पुनः अपनी यात्रा पर रवाना होते हैं.

35 साल पहले डाक यात्रा के दौरान लिया था सेवा का संकल्प

शिविर कमेटी से जुड़े बेलदौर के वरिष्ठ शिवभक्त अजय भगत, राजीव कुमार, श्रवण भगत, रितेश, अशोक भगत, रौशन शर्मा, महेंद्र साह आदि ने बताया कि करीब 35 वर्ष पूर्व जब वे स्वयं डाक बम के रूप में देवघर जा रहे थे, तब इस पूरे क्षेत्र में कोई सेवा शिविर नहीं हुआ करता था.

लगातार पैदल चलने के कारण जब श्रद्धालु थक जाते थे, तो उनकी तकलीफ देखकर इन शिवभक्तों ने जयनगर जोड़ीपार के पास एक छोटा सा सेवा कैंप लगाने का संकल्प लिया. धीरे-धीरे यह प्रयास एक विशाल सेवा शिविर में तब्दील हो गया. आज 35 वर्ष पूरे होने के बाद यह शिविर कांवरिया पथ पर निस्वार्थ सेवा की मजबूत पहचान बन चुका है.


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लेखक के बारे में

By राजकिशोर सिंह

राजकिशोर सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. अभी प्रभात खबर के खगड़िया कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति, राजनीति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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