सहजानंद सरस्वती पुस्तकालय से हटेगा अतिक्रमण, 11 मार्च को प्रशासन की कार्रवाई

डॉ श्रीकृष्ण सिंह ने लिखे थे प्रेरक वचन, वही पुस्तकालय अब अतिक्रमण से होगा मुक्त

डॉ श्रीकृष्ण सिंह ने लिखे थे प्रेरक वचन, वही पुस्तकालय अब अतिक्रमण से होगा मुक्त परबत्ता. नगर पंचायत क्षेत्र के कन्हैयाचक गांव में स्थित पुस्तकालय भवन को अतिक्रमण से मुक्त कराने को लेकर प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है. इस पुस्तकालय का अपना समृद्ध इतिहास रहा है. आजादी से पूर्व बिहार प्रांत के प्रधानमंत्री डॉ श्रीकृष्ण सिंह 10 जनवरी 1939 को यहां पहुंचकर अतिथि संवाद पंजी में पुस्तकालय के विषय में सकारात्मक और प्रेरक वचन अंकित किया था. पुनः स्वतंत्र भारत में बिहार का पहला मुख्यमंत्री निर्वाचित होने के बाद उन्होंने 1954 में पुस्तकालय का दौरा किया था. यहां 2 जुलाई 1925 को उत्तर बोर्ड मुंगेर के सदस्य बलदेव प्रसाद सिंह द्वारा निरीक्षण किया गया था. इसके अलावा अब तक दर्जनों विधायक एवं सांसद यहां पहुंचकर पुस्तकालय को अपनी सकारात्मक टिप्पणी देकर इसके शुभचिंतकों को उम्मीद की किरण प्रदान किया है. अब इस अतिक्रमण हटाने को लेकर परबत्ता अंचलाधिकारी हरिनाथ राम ने अनुमंडल पदाधिकारी से अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की है. प्रशासन द्वारा 11 मार्च को अतिक्रमण हटाने की तिथि निर्धारित की गई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार कन्हैयाचक गांव में स्थित पुस्तकालय का एक बड़ा इतिहास है. 1924 से पुस्तकालय संचालित हुआ. कन्हैयाचक गांव में पुस्तकालय निर्माण के उद्देश्य से गांव के ही स्वर्गीय बलराम चौधरी ने अपनी तीन कट्ठा जमीन स्वामी सहजानंद सरस्वती ट्रस्ट के नाम दान दिया था. बाद में गांव के लोगों ने आपसी सहयोग और चंदा इकट्ठा कर पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया था. वर्ष 1955-56 में इस पुस्तकालय की नींव रखी गई थी. भवन में एक बड़ा हॉल, दो कमरे तथा एक विस्तृत बरामदा बनाया गया था. जहां ग्रामीणों और विद्यार्थियों के लिए अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी. ग्रामीणों के अनुसार कई वर्षों तक यह पुस्तकालय गांव के विद्यार्थियों और युवाओं के लिए ज्ञान का केंद्र बना रहा. यहां विभिन्न विषयों की हजारों किताबें रखी गई थीं, जिनका लाभ गांव के लोग उठाते थे. लेकिन वर्ष 2004-05 के आसपास दानदाता के वंशजों ने पुस्तकालय भवन पर अतिक्रमण कर लिया. वर्तमान में उस भवन में दो परिवार निवास कर रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि अतिक्रमण करने वालों ने उस समय पुस्तकालय के कमरे का ताला तोड़ दिया और अंदर रखी हजारों किताबों को गायब कर दिया. इसके बाद धीरे-धीरे पूरे भवन पर कब्जा कर लिया गया. ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले को लेकर कई बार प्रशासनिक स्तर पर पहल की गई. अंचल कार्यालय द्वारा जमीन की मापी कराकर भवन को खाली कराने का प्रयास भी किया गया, लेकिन अब तक पुस्तकालय को अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया जा सका. वहीं अतिक्रमण कर रहे लोगों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने जमीन दान करते समय यह शर्त रखी थी कि यदि भविष्य में पुस्तकालय का संचालन बंद हो जाएगा तो दान की गई जमीन दानदाता के वंशजों को वापस मिल जाएगी. इसी आधार पर वे लोग उस जमीन पर अपना अधिकार जता रहे हैं. कहते हैं गोगरी एसडीओ गोगरी अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देश के आलोक में अतिक्रमित सहजानंद सरस्वती पुस्तकालय को जल्द ही अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. एसडीओ ने कहा कि सार्वजनिक स्थल और शैक्षणिक संस्थानों की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >