अनदेखी. सुनवाई के दौरान सरकारी राशि बंदरबांट के खेल का खुला राज
गोगरी अनुमंडल के तीन विद्यालयों के स्टेडियम निर्माण में कार्य एजेंसी व जिला योजना पदाधिकारी व संवेदक की मिलीभगत से लाखों की राशि फूंकने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी गयी.
खगड़िया : गोगरी अनुमंडल अधीन तीन विद्यालयों में लाखों की लागत से स्टेडियम निर्माण में बड़े पैमाने पर गोलमाल का खुलासा हुआ है. वर्ष 2010-11 की इस योजना का आलम यह है कि पुरानी राशि खर्च हुई नहीं लेकिन जिला योजना पदाधिकारी ने संवेदक को मदद पहुंचाने के ख्याल से दोबारा लाखों का चेक काट दिया. लिहाजा सात बरसों में स्टेडियम निर्माण आधा भी नहीं हो पाया है.
कार्य एजेंसी, जिला योजना पदाधिकारी व संवेदक की मिलीभगत से स्टेडियम निर्माण के लिये मिली सरकारी राशि का बंदरबांट कर लिया गया. स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व में निर्गत राशि खर्च हुई भी नहीं लेकिन दोबारा लाखों की राशि का चेक काट दिया गया. चेक काटने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखायी गयी? इसके पीछे क्या राज थे यह तो कार्य एजेंसी व जिला योजना पदाधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं. हालांकि कार्य एजेंसी लघु सिंचाई प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, जिला योजना पदाधिकारी ने ऐसे किसी भी आरोप को बकवास करार दिया है.
गोगरी निवासी परिवादी मनोज कुमार मिश्र ने स्टेडियम निर्माण की राशि की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में शिकायत की थी. जिसकी सुनवाई के दौरान जो तथ्य सामने आये वह चौंकाने वाले थे. गोगरी अनुमंडल के तीन विद्यालय परिसर में एक-एक फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण कराया जाना था. कई वर्ष गुजर जाने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है.
आरोप के अनुसार कार्य एजेंसी की शिथिलता की वजह से इन तीनों स्टेडियम की प्राक्कलित राशि में संशोधन करते हुए वृद्धि करनी पड़ी. जिससे अनावश्यक सरकारी का अपव्यय हुआ. इन तीनों स्टेडियम के संबंध में वस्तुस्थिति की जानकारी जिला योजना पदाधिकारी, लघु सिंचाई प्रमंडल खगड़िया के कार्यपालक अभियंता से नोटिस निर्गत कर बिंदुवार जवाब मांगा गया था. सूचना के अनुसार उच्च विद्यालय कन्हैयाचक, परबत्ता में 33.217 लाख, एसपीएम उच्च विद्यालय महेशखूंट परिसर में 33.217 लाख, भगवान उच्च विद्यालय गोगरी में फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण 45.244 लाख रुपये से कराया जाना था. जिसके लिये क्रमश: 30, 20, 15 लाख रुपये कार्य एजेंसी के लिये विमुक्त किया गया.
लेकिन अभी तक क्रमश : 17.58, 14.66, 0.17 लाख राशि ही खर्च की जा सकी है. उक्त तीनों स्टेडियमों के लिये वर्ष 2010-11 में एकरारनामा किया गया था. जिसके अनुसार 24.01.2011 तक निर्माण कार्य पूरा करने की जिम्मेवारी कार्य एजेंसी कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई प्रमंडल खगड़िया की थी. लेकिन संवेदक व कार्य एजेंसी की शिथिलता के कारण समय पर कार्य पूर्ण नहीं हो सका.
जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने सुनवाई के दौरान कहा कि उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि अभी भी संवेदक के पास काफी बड़ी राशि पड़ी हुई है. जबकि योजना में कोई भी काम नहीं हो रहा है. निश्चित तौर पर दी गयी जानकारी के अनुसार योजना का पर्यवेक्षण तथा उसका निरीक्षण करने की प्राथमिक जिम्मेवारी कार्यकारी एजेंसी होने के नाते लघु सिंचाई प्रमंडल खगड़िया के कार्यपालक अभियंता के साथ साथ जिला योजना पदाधिकारी की है.
अभी तक राशि बची रहने के बावजूद स्टेडियम का निर्माण कार्य लगभग सात वर्ष के बाद भी पूर्ण नहीं हो सका है. फिर भी संवेदक के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी. जो ना सिर्फ आपत्तिजनक है बल्कि कर्तव्य के प्रति लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है. जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने कार्य एजेंसी लघु सिंचाई प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, जिला योजना पदाधिकारी ने प्राथमिकता के तौर पर तीनों स्टेडियम का निर्माण कार्य पूरा करवाने की दिशा में ठोस पहल कर 25 अप्रैल तक अवगत कराने का निर्देश दिया है.
योजना से जुड़े कागजात गायब
जिला योजना पदाधिकारी एवं कार्यपालक अभियंता लघु सिचाई प्रमंडल खगड़िया ने सुनवाई के दौरान यह स्वीकार किया है कि उनके कार्यालय में इन तीनों योजनाओं से संबंधित प्रारंभिक प्राक्कलन तक उपलब्ध नहीं है. जबकि जिला योजना पदाधिकारी ने यह बताया कि ज्ञापांक संख्या 263 दिनांक 15.03.2014 से उन्हें उपरोक्त तीनों योजनाओं के लिये दोबारा आवंटन प्राप्त हुआ. जिसे तत्काल उपावंटित कर दिया गया. बताया जाता है कि 40 लाख रुपये का दोबारा चेक काट कर देने से पहले यह भी जांच करना मुनासिब नहीं समझा गया कि पूर्व से आवंटित राशि खर्च हुई भी या नहीं. ऐसे में सवाल उठता है कि जिला योजना पदाधिकारी को चेक काटने की इतनी जल्दीबाजी क्यों थी? सूत्रों की मानें तो परदे के पीछे सरकारी राशि का बड़े पैमाने पर बंदरबांट का खेल हुआ है. जिसमें अधिकारी से लेकर संवेदक की भूमिका सवालों के घेरे में है. इधर, कार्य एजेंसी द्वारा कई बार कहने के बाद भी कार्य प्रगति से संबंधित कोई भी जानकारी उनके कार्यालय को उपलब्ध नहीं करायी गयी.
इन विद्यालयों में होना था स्टेडियम निर्माण
एसपीएम उच्च विद्यालय महेशखूंट 33.217 लाख
भगवान उच्च विद्यालय गोगरी 45.244 लाख रुपये
उच्च विद्यालय कन्हैयाचक, परबत्ता : 33.217 लाख रुपये
योजना : वर्ष 2010-11
समय सीमा : 24.01.2011 तक
(योजना पूरी होने में देरी के कारण प्राक्कलन में संशोधन होने से लाखों की सरकारी राशि का अपव्यय हुआ.)
