मनमानी. अवैध वसूली का दबाव दे रहे अलौली पीएचसी प्रभारी
अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित लिपिक कृष्णा कुमार ने डीएम व सीएस को आवेदन देकर पीएचसी प्रभारी की पोल खोलते हुए कार्रवाई की गुहार लगायी है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की नींद अभी तक नहीं खुली है. भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग कतरा रहा है.
खगड़िया : जब चाहेंगे, जैसे चाहेंगे तुम पर कोई आरोप लगा कर बरबाद कर देंगे मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. यह आरोप कोई आम आदमी नहीं बल्कि अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित लिपिक ने पीएचसी प्रभारी पर लगाया है. जिसके बाद अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इन दिनों नया बवाल खड़ा हो गया है. पीएचसी में पदस्थापित लिपिक ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पर अवैध वसूली कर देने वरना बरबाद करने की धमकी देने का आरोप लगा सनसनी मचा दिया है.
पीएचसी प्रभारी पर सरकारी योजनाओं में कमीशन व लाभार्थियों से अवैध वसूली का दबाव देने मामला सामने आते ही स्वास्थ्य महकमा में हड़कंप मच गया है. पीएचसी के पीड़ित लिपिक कृष्णा कुमार ने पीएचसी प्रभारी डॉ संजीव कुमार के भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए डीएम व सीएस को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी है. ताज्जुब की बात है कि आवेदन देने के बाद जांच कर कार्रवाई की बजाय स्वास्थ्य विभाग मामले की लीपापोती में लगा हुआ है.
ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्वास्थ्य विभाग में स्वास्थ्यकर्मियों की शिकायत का यह हाल है तो आम लोगों की फरियाद का क्या हश्र होता होगा. इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. इधर, अलौली पीएचसी प्रभारी ने लिपिक के आरोपों को बेबुनियाद व मनगढ़ंत करार दिया है. जबकि पीड़ित लिपिक ने एसडीओ दरबार में सनहा दर्ज कराते हुए झूठा आरोप लगा कर साजिश करने का आरोप लगाते हुए पीएचसी प्रभारी के खिलाफ सनहा दर्ज कराया है.
नजराना दो वरना बरबाद कर देंगे : डीएम को दिये आवेदन में लिपिक कृष्णा कुमार ने साफ तौर पर पीएचसी प्रभारी को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि यहां तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को हर वक्त अवैध राशि वसूल कर देने का दबाव दिया जाता है. बकौल लिपिक, ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई का धौंस दिखाते हुए पीएचसी प्रभारी बरबाद करने की धमकी देते हैं.
इतना ही नहीं नाजायज पैसा देने में देरी पर प्रभारी द्वारा गाली-गलौज करने का आरोप लगाते हुए लिपिक ने कहा है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारी कभी भी झूठे आरोप में फंसा कर कार्रवाई कर सकते हैं. लिपिक के अनुसार बीते दिनों अवैध राशि देने से इनकार करने पर मानसिक रूप से परेशान करने के लिये झूठे आरोप लगा कर 14 फरवरी को एक ही दिन में पीएचसी प्रभारी ने मुझसे तीन-तीन स्पष्टीकरण पूछा है. सूत्रों की मानें तो प्रसव से लेकर जननी बाल सुरक्षा योजना का लाभ देने में नाजायज राशि की वसूली का खेल अभी भी जारी है.
अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित लिपिक ने डीएम-सीएस को दिया आवेदन
सरकारी योजनाओं में लाभुकों से अवैध राशि वसूली सहित योजनाओं में कमीशन देने का दबाव देते हैं पीएचसी प्रभारी
पीएचसी प्रभारी के तानाशाही रवैये से भयभीत स्वास्थ्यकर्मी लिपिक ने एसडीओ कोर्ट में दर्ज कराया सनहा
लिपिक के आवेदन पर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की बजाय मामले की लीपापोती में जुटा विभाग
सरकारी योजनाओं में कमीशन का खेल
पूर्व में भी अलौली पीएचसी में सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी के खेल का खुलासा हो चुका है. अभी हाल ही में तबादला किये गये बीएचएम चेतन शर्मा ने तो अवैध वसूली के लिये पीएचसी में दलाल की तैनाती कर रखी थी. कई लोगों पर कार्रवाई हुई लेकिन अलौली अस्पताल में तैनात कई अधिकारी व कर्मचारी भ्रष्टाचार के दलदल से निकलने का नाम नहीं ले रहे हैं. इधर, पीएचसी में पदस्थापित लिपिक ने कहा है कि पीएचसी प्रभारी कहते हैं कि तुमको पता नहीं है.
हम सिविल सर्जन का भी फोन रिसीव नहीं करते हैं. बताया जाता है कि आशा कार्यकर्ताओं को मिलने वाले प्रति लाभुक 600 रुपये में 50 रुपये अवैध राशि की वसूली की जाती है. इतना ही नहीं गृह भ्रमण के दौरान प्रत्येक मरीज के हिसाब से मिलने वाले 250 रुपये में से भी 50 रुपये ऑफिस खर्च के नाम पर काट लिया जाता है. कई आशा कार्यकर्ताओं ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि कमीशन के फेर में एक वर्ष से गृह भ्रमण प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित रखा गया है.
मनगढ़ंत व बेबुनियाद है आरोप
लिपिक द्वारा मेरे ऊपर लगाये गये सारे आरोप बेबुनियाद व मनगढ़ंत हैं. सरकारी प्रावधान के अनुसार काम करने के लिये कहने पर साजिश के तहत अनर्गल आरोप लगाये जा रहे हैं.
डॉ संजीव कुमार, अलौली पीएचसी प्रभारी.
पल्ला झाड़ रहे सीएस
सिविल सर्जन डाॅ अरुण कुमार सिंह ने पूछने पर टालमटोल वाला जवाब देते हुए कहा कि अलौली पीएचसी में आये दिन ऐसे ही होते रहता है. लिपिक ने अगर आवेदन दिया है तो जांच कर कार्रवाई की जायेगी. अभी वित्तीय काम कर रहे हैं. बाद में बात करेंगे.
