परेशानी. संभावनाओं की धरती पर संसाधनों का अकाल
गोगरी : समय बदला, परिस्थितियां बदली, विकास के नये आयाम गढ़े गये. खगड़िया जिले में सड़कों का जाल तो बिछा लेकिन संसाधनों के अकाल के कारण उद्योग धंधों को पंख नहीं लग सके. बिजली व्यवस्था में सुधार तो दिखी लेकिन ग्रामीण क्षेत्र इससे भी अछूते रह गए. तमाम कवायदों के बावजूद जन वितरण व्यवस्था व्यवस्थित नहीं हो पाई. अस्पताल में डॉक्टर की कमी से लेकर आम लोगों को इलाज के लिये भटकने की नौबत आज भी बरकरार है. सरकारी स्कूलों की बदतर स्थिति जस की तस बनी हुई है.
सड़कों की बात करें तो दिल्ली से असम को जोड़ने वाली आसाम के नाम से विख्यात एनएच 31 भी इसी जिले होकर गुजरती है. एनएच 107 भी चकाचक स्थिति में है. जो महेशखूंट में एनएच 31 को जोड़ती है. हालांकि उसराहा के पास बने बीपी मंडल सेतु के क्षतिग्रस्त हो जाने से सहरसा, सुपौल, मधेपुरा व पड़ोसी देश नेपाल का क्षेत्र से सड़क संपर्क जरूर भंग है. पुल की मरम्मत युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. अगर समय पर पुल मरम्मत का कार्य हो गया, तो जून तक कोसी क्षेत्र से जिले व भागलपुर से सड़क संपर्क स्थापित हो जायेगा. ग्रामीण सड़कें भी अच्छी स्थिति में हैं और उन्हें भी मुख्य सड़क से जोड़ा गया है. कल तक दुरूह समझा जानेवाला सड़क यातायात अब इस जिले के लिए अभिशाप नहीं वरदान है. वहीं सड़क के माध्यम से अन्य प्रांतों की भी दूरी सिमट कर रह गयी है. सड़क चकाचक रहने के कारण आये दिन दुर्घटना होती रहती है.
