अब सीधे चयनमुक्त नहीं होंगी सेविकाएं

आंगनबाड़ी केंद्र संचालन तथा अनियमितता पाये जाने के बाद सेविका/सहायिका को मिलने वाली सजा के प्रावधान में संशोधन किया गया है. पहले की तरह अब सेविका-सहायिका पर सीधे चयनमुक्ति की कार्रवाई नहीं की जायेगी. खगड़िया : अब अधिकारियों द्वारा आंगनबाड़ी सेविका को सीधे चयनमुक्त करने पर रोक लगा दी गयी है. आंगनबाड़ी केंद्र संचालन तथा […]

आंगनबाड़ी केंद्र संचालन तथा अनियमितता पाये जाने के बाद सेविका/सहायिका को मिलने वाली सजा के प्रावधान में संशोधन किया गया है. पहले की तरह अब सेविका-सहायिका पर सीधे चयनमुक्ति की कार्रवाई नहीं की जायेगी.
खगड़िया : अब अधिकारियों द्वारा आंगनबाड़ी सेविका को सीधे चयनमुक्त करने पर रोक लगा दी गयी है. आंगनबाड़ी केंद्र संचालन तथा अनियमितता पाये जाने के बाद सेविका/ सहायिका को मिलने वाली सजा के प्रावधान में संशोधन किया गया है. पहले की तरह अब सेविका-सहायिका के सीधे चयनमुक्ति की कार्रवाई नहीं की जायेगी.
राज्य स्तर से जारी संशोधित आदेश में यह कहा गया है कि पहले सेविका/सहायिका को चेतावनी दी जायेगी. इसके बाद भी नहीं सुधरे तो राशि कटौती होगी. अगर फिर भी भी गलती/गड़बड़ी का सिलसिला नहीं रुकता है तब अंत में सेविका/सहायिका को चयनमुक्त किया जायेगा. कर्मियों को दिये जाने वाले दंड से संबंधित मार्गदर्शिका समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव वंदना किन्नी के द्वारा जारी किया गया है. यह आदेश पूरे राज्य भर में लागू होगा. जानकारी के मुताबिक प्रधान सचिव ने कार्रवाई को लेकर संशोधित आदेश को डीएम को भेज कर अनुपालन का निर्देश दिया गया है.
प्रधान सचिव ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरण होने वाले टीएचआर एवं पोषाहार, वितरण में अनियमितता, सेविका, सहायिका की अनुपस्थिति एवं बच्चों की केंद्र की उपस्थिति को लेकर आदेश जारी किया है. इस आदेश में इन तीनों मामलों में कौन कौन सी कार्रवाई की जानी है इसका स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है.
क्या है संशोधित आदेश
पहले बात टीएचआर एवं पोषाहार वितरण की अगर केंद्रो पर पोषाहार एवं टीएचआर वितरण में गड़बड़ी होती है तो समतुल्य राशि की वसूली सेविका के मानदेय से होगी. अगर दोबारा उस केंद्र पर अनियमितता होती है तो समतुल्य राशि के अलावे एक हजार रुपये अतिरिक्त सेविका से वसूली की जायेगी.
अब तक क्या होता आया है
जानकार बताते हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र संचालन को लेकर पहले के आदेश भी सख्त थे. पहले गंभीर गलतियों पर सीधे स्पष्टीकरण पुछकर सुनवाई करते हुए चयनमुक्ति की कार्रवाई होती थी.
लेकिन अब दंड को लेकर जारी विभागीय मार्गदर्शिका में ठीक इसके विपरीत पहले चेतावनी/मानदेय कटौती करने को कहा गया है. प्रधान सचिव ने गड़बड़ी सहित अन्य मामलों में सेविका से पूछे जाने वाले स्पष्टीकरण, इन्हें दी जाने वाली चेतावनी सहित सेविका/सहायिका के मानदेय कटौती व इनके विरुद्ध की जाने वाली चयनमुक्ति से संबंधित जानकारी संबंधित वार्ड के वार्ड सदस्य,पंच एवं आंगनबाड़ी विकास समिति को निश्चित रूप से देने का आदेश जारी किया है ताकि इस व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रही.
अब बात बच्चों की उपस्थिति की करते हैं. आंगनबाड़ी केंद्र पर नामांकित बच्चों की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम पाये जाने पर पहले महिला पर्यवेक्षिका पहले सेविका से स्पष्टीकरण पूछेंगी. अगर सेविका का जवाब संतोष प्रद नहीं रहा तो इन्हें चेतावनी दी जायेगी. अगर चेतावनी के बाद भी पुन: केंद्र पर अनियमितता फिर अंतिम चेतावनी दी जायेगी.
फिर भी अनियमितता होने पर मानदेय कटौती व चयनमुक्ति की कार्रवाई होगी. इसी तरह सेविका व सहायिका के अनुपस्थित पाये जाने के बाद तथा केंद्र बंद रहने की स्थिति में उन्हें एलएस के द्वारा चेतावनी दी जायेगी. फिर ऐसी बातों की पुनरावृत्ति होने पर उन्हें अंतिम चेतावनी दी जायेगी. बिना बतायें 15 दिनों तक अनुपस्थित रहने पर सेविका/सहायिका के मानदेय से 15 दिनों की राशि कटौती की जायेगी. अगर इसके बाद भी वे केंद्र से गायब पाये जातें हैं तो डीपीओ इनके विरुद्ध चयन मुक्ति की कार्रवाई आरंभ करेंगे.

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