अफीम की खेती. बंगाल के मालदह का था किसान
तीन माह पहले लगायी गयी थी फसल
बेलदौर : अफीम की खेती करने वाले किसान कौन हैं, यह बड़ा सवाल बन गया है. पुलिस इस गुत्थी को नहीं सुलझा पायी है. सूत्रों की मानें तो पुलिस को अफीम की खेती किये जाने की जानकारी एक माह पहले से ही थी. पुलिस इसकी खेती करने वाले किसान को खेत में पकड़ने की फिराक में थी, लेकिन वे असफल हो गये. पुलिस खेत पर किसान के आने का इंतजार एक सप्ताह से कर रही थी.
रविवार को किसान खेत पर आने वाला था. लेकिन उसके आने के पूर्व ही पुलिस पहुंच गयी, जिसकी भनक किसान को लग गयी. पुलिस हिरासत में लिये गये उदहा बासा के मजदूर भूषण ठाकुर, पंच सुरेश मंडल व राजेद्र मंडल से पुलिस पूछताछ कर रही है. जानकारी के मुताबिक बंगाल के मालदह जिले के किसान ने डेढ़ बीघा जमीन लीज पर लिया था. बेला नौवाद के प्रेमचंद मिस्त्री को छह माह के लिए तीस हजार रुपये खेती करने के एवज में दिया था. इसमें किसान को बीस हजार रुपये भुगतान कर दिया गया था.
प्रेमचंद ने इस जमीन को गांव के कपिलदेव व अरविंद शर्मा से लगभग पांच वर्ष पूर्व सूद भरना लिया था. अफीम की खेती लगाने वाले किसान अपने साथ प्रशिक्षित मजदूर को लाकर इसकी देख रेख करता था. जबकि भूषण ठाकुर इस खेत में निकाई-गुड़ाई का काम करता था. पूर्व से ही पुलिस को अफीम की खेती करने वाले किसान की तलाश थी. इससे पहले पुलिस ने अलौली में अफीम की खेती किये जाने के मामले का उद्भेन किया था. जिले में लगातार अफीम की खेती किये जाने की जानकारी मिलने के बावजूद पुलिस मुख्य सरगना तक नहीं पहुंच पा रही है.
उन्नत किस्म का था पौधा
एएसपी अभियान विमलेश चंद्र झा ने बताया कि अब तक पकड़े गये अफीम के पौधे में से यह सबसे उन्नत किस्म का पौधा था. एक सप्ताह के अंदर इसके फल में दूध भर जाता है. इसे पहले नष्ट नहीं किया जाता तो किसान इस फसल को काटने में सफल हो जाता. किसान ने इसकी खेती तब लगायी, जब इसके आस पास के खेतों में किसान मकई का खेती कर चुके थे.
