ठंड में बढ़ा निमोनिया व कोल्ड डायरिया का प्रकोप

खगड़िया : ठंड धीरे- धीरे बढ़ रहा है. तापमान में कमी आती जा रही है. पछिया हवा भी चलने लगी है. पर अब तक लोग पूरी तरह ठंड को नजरअंदाज कर रहे हैं. यह नजर अंदाज करना लोगों को भारी पड़ सकता है. खासकर जिनके घर में छोटे बच्चे हैं. तापमान में गिरावट आने के […]

खगड़िया : ठंड धीरे- धीरे बढ़ रहा है. तापमान में कमी आती जा रही है. पछिया हवा भी चलने लगी है. पर अब तक लोग पूरी तरह ठंड को नजरअंदाज कर रहे हैं. यह नजर अंदाज करना लोगों को भारी पड़ सकता है. खासकर जिनके घर में छोटे बच्चे हैं. तापमान में गिरावट आने के साथ ही बच्चों में कोल्ड डायरिया व निमोनिया बीमारी आम हो जाती है. यह कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है. ऐसे में यह जरूरी है कि हम कुछ एहतियात बरतें और जब बच्चों में बीमारी के लक्षण दिखे तो तत्काल ही चिकित्सक से सलाह लें.

घर में रखें न्यूमोलाइजर : रेफरल अस्पताल गोगरी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ चंद्रप्रकाश व शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ राहुल कुमार अकेला बताते है कि बदलते मौसम में 0 से 5 वर्षों के बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार, सांस की तकलीफ आदि बीमारियों का प्रकोप अधिक होता है. डाॅ अकेला इस बाबत सलाह देते है कि ठंड के मौसम बचाव ही सुरक्षा है. बावजूद इसके बच्चों को हमेशा गर्म कपड़े पहनाकर रखे. गुन-गुने पानी से उन्हें स्नान करावें, घर में न्यूमोलाइजर अवश्य रखें. सर्दी खांसी व बुखार की शिकायत होने पर बच्चों को तत्काल चिकित्सकों से दिखाकर उचित सलाह लें. बच्चों की बीमारियों को नजर अंदाज नहीं करें.
सांस तेज चले, तो दिखाएं: ठंड के मौसम में बच्चों में अधिकतर निमोनिया बीमारी का खतरा रहता है. यह बीमारी बच्चों में होने का मतलब है कि बच्चे को ठंड अधिक लग गयी है. इस बीमारी का लक्षण है कि बच्चे तेज तेज सांस लेने लगते हैं. पेट खपने लगता है व बुखार भी चढ़ जाता है. इस बीमारी में बच्चे का चेहरा बेरूखा दिखने लगता है. यदि इस प्रकार के लक्षण बच्चों में दिखे तो तत्काल ही योग्य चिकित्सक से दिखाना चाहिए. बच्चों को गर्म कपड़े से ढंक कर रखना चाहिए एवं कमरा भी गर्म रहना चाहिए.
बच्चों में ठंड के मौसम में कोल्ड डायरिया होना भी आम है. यह बीमारी भी कम खतरनाक नहीं है. इस बीमारी में बच्चों को जल्दी जल्दी पतला दस्त होने लगता है. जिससे शरीर में पानी का मात्रा कम हो जाता है.इस बीमारी में एंटी डायरियल दवा के साथ साथ जिंक सस्पेंसन दवा का उपयोग किया जाता है. दोनों ही बीमारी में बच्चों के प्रति सावधानी बरतना आवश्यक है. रात में सोते समय बच्चे शरीर पर से कपड़ा ना फेंक ले, इसके लिये मां को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. रात में उठकर बच्चे को देखते रहना चाहिए कि बच्चे को बुखार तो नहीं चढ़ गया है.
कोहरे में होने लगी परेशानी.

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