सिर्फ प्रधानाध्यापक पर ही प्राथमिकी दर्ज क्यों ?

खगड़िया : छह महीने तक सोये रहने के बाद अभी भी शिक्षा विभाग की नींद पूरी तरह खुल नहीं पायी है. आर्य कन्या उच्च विद्यालय में फर्जी बहाली से लेकर लाखों के फर्जी भुगतान मामले में डीएम के कड़े रुख के बाद गरदन फंसते देख डीपीओ स्थापना द्वारा सिर्फ प्रधानाध्यापक पर प्राथमिकी दर्ज करवाये जाने […]

खगड़िया : छह महीने तक सोये रहने के बाद अभी भी शिक्षा विभाग की नींद पूरी तरह खुल नहीं पायी है. आर्य कन्या उच्च विद्यालय में फर्जी बहाली से लेकर लाखों के फर्जी भुगतान मामले में डीएम के कड़े रुख के बाद गरदन फंसते देख डीपीओ स्थापना द्वारा सिर्फ प्रधानाध्यापक पर प्राथमिकी दर्ज करवाये जाने पर सवाल उठने शुरू हो गये हैं.

विद्यालय प्रबंध समिति के सचिव नीलकमल दिवाकर ने डीपीओ स्थापना सुरेश कुमार साहू के फैसले पर अंगुली उठाते हुए कहा कि जिस फर्जी वेतन विपत्र के आधार पर वेतन भुगतान करने के लिये चेक दिया गया उस पर तत्कालीन सचिव व प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर हैं तो सिर्फ एक ही प्राथमिकी दर्ज करवाने के पीछे क्या राज हैं? उन्होंने कहा कि पूरे मामले में शुरू से ही डीइओ व डीपीओ स्थापना की कार्यशैली कटघरे में है. पहले डीइओ द्वारा फर्जी तरीके से बहाल कर्मचारियों के वेतन का आदेश देना,

फिर बिना जांच पड़ताल किये ही आंख मूंद कर डीपीओ स्थापना द्वारा 37 लाख रुपये का चेक काटा जाना फिर महीनों तक फाइलों को दबाये रखने जैसे कई घटनाक्रम शिक्षा विभाग के इन अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करने के लिये काफी है. हालांकि 23, 22,500 रुपये वह राशि है जो फर्जीवाड़ा के सहारे बहाल कर्मियों के बीच बांटे गये. इसी राशि की वसूली अब प्रधानाध्यापक से करने की

तैयारी है.
अब कार्रवाई में भी बेइमानी
इधर, सवाल उठता हक कि जब गलत विपत्र को धोखाधड़ी का अहम सबूत मानते हुए डीपीओ ने सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज करवायी है तो उस विपत्र पर हस्ताक्षर करने वाले तत्कालीन सचिव पर कार्रवाई क्यों नहीं की गयी? इधर, प्रभार लेने के लिये भटक रहे नवनिर्वाचित सचिव श्री दिवाकर ने कहा कि पूरे मामले में डीएम के कड़े रुख को भांप यह कार्रवाई भी की गयी वरना शिक्षा विभाग के अधिकारी तो पूरे फर्जीवाड़ा प्रकरण की फाइल को दबाये बैठे थे.
इधर, सदर थाना में आर्य कन्या उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक नंद लाल साह पर धारा 419, 420, 406 के तहत कांड संख्या 612/16 दर्ज होने के बाद पिछले दरवाजे से बहाल 56 कर्मचारियों को नौकरी जाने व लिये गये वेतन वसूली का भय सताने लगा है. बता दें कि डीएम जय सिंह द्वारा पहले ही फर्जी तरीके से बहाल विद्यालय के कर्मचारियों की बहाली रद्द करने व भुगतान की गयी राशि वसूली के संकेत देने से हड़कंप व्याप्त है.
डीइओ या डीपीओ में कौन सच्चा, कौन झूठा
इस बात की सच्चाई जानने के लिये फ्लैशबैक में चलते हैं. डीपीओ स्थापना सुरेश साहू के अनुसार छह मई 2015 को डीइओ साहब की एक चिठ्ठी जारी होती है जिसमें कहा गया कि नयी बहाली में विद्यालय में बहाल कर्मियों के बारे में कहा गया कि इसकी सूचना कार्यालय को अप्राप्त है.
ठीक इसके पांच दिन बाद 11 मई 2015 को डीइओ की नींद खुली और उन्होंने डीपीओ स्थापना को नये पुराने सभी कर्मियों को वेतन/मानदेय भुगतान करने आदेश दे दिया. अब मामला तूल पकड़ने के बाद डीइओ ने पल्ला झाड़ते हुए वेतन/मानदेय भुगतान में हुई गड़बड़ी के लिये डीपीओ स्थापना श्री साहू व संचिका प्रभारी को जिम्मेवार ठहराते हुए प्रपत्र क गठन को हरी झंडी देने की बात कही है. इधर, डीपीओ स्थापना ने बताया कि डीइओ के पत्र के आदेशानुसार उन्होंने आर्य कन्या उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक व तत्कालीन सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से भेजे गये विपत्र के अनुसार उन्होंने करीब 37 लाख रुपये का चेक काटा था.
बता दें कि तीन दिन पूर्व डीपीओ स्थापना ने अपनी गरदन फंसते देख गलत विपत्र देकर राशि निर्गत करवाने के लिये नगर थाना में प्रभारी प्रधानाध्यापक पर प्राथमिकी दर्ज करवायी है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर डीइओ व डीपीओ में कौन सच और कौन झूठ बोल रहे हैं.
मामला आर्य कन्या उच्च विद्यालय में गलत विपत्र के आधार पर फर्जी कर्मचारियों को वेतन भुगतान में फर्जीवाड़ा का
डीपीओ स्थापना ने अनियमित व धोखाधड़ी के लिये आर्य कन्या उच्च विद्यालय पर दर्ज करवायी है प्राथमिकी
वेतन विपत्र पर सचिव व प्रधानाध्यापक के हैं हस्ताक्षर तो सिर्फ विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर ही प्राथमिकी क्यों
फर्जी कर्मचारियों को गलत वेतन भुगतान का मामला तूल पकड़ने के बाद गरदन फंसते देख डीपीओ की खुली नींद
डीइओ ने पूरी गड़बड़ी के लिये डीपीओ स्थापना को ठहराया है जिम्मेदार .
.. डीपीओ ने डीइओ पर उठाये सवाल
डीइओ ने पूरी गड़बड़ी के लिये डीपीओ स्थापना को ठहराया है जिम्मेदार … डीपीओ ने डीइओ पर उठाये सवाल
डीपीओ स्थापना के आवेदन पर आर्य कन्या उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक नंद लाल साह पर कांड संख्या 612/16 दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गयी है. पूरे मामले में प्रधानाध्यापक से धोखाधड़ी के सहारे फर्जी कर्मचारियों के वेतन मद में दी गयी 23, 22,500 वसूली करने को कहा गया है.
मो इस्लाम, सदर थानाध्यक्ष.
वेतन मद में दी गयी राशि भुगतान के लिये प्रधानाध्यापक के नाम से बैकर्स चेक दिये गये इसलिये उनके उपर ही प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. गलत विपत्र पर सचिव व प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर रहने के बाद भी सिर्फ प्रधानाध्यापक पर प्राथमिकी दर्ज करना सही है.
सुरेश कुमार साहू , डीपीओ स्थापना
जब फर्जी तरीके से तैयार वेतन विपत्र पर प्रबंधन समिति के तत्कालीन सचिव व प्रधानाध्यापक दोनों के हस्ताक्षर हैं तो सिर्फ एक पर प्राथमिकी दर्ज करवाना कहां तक जायज है. कहीं सचिव को बचाने के लिये पर्दे के पीछे खेल तो नहीं किया गया है. पूरे मामले में डीइओ व डीपीओ स्थापना की कार्यशैली शुरू से कटघरे में है.
नीलकमल दिवाकर, सचिव.

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