अबतक दोषियों पर नहीं हुई कार्रवाई लापरवाही. डीआरडीए कार्यालय में लंबित है फाइल

मनरेगा के आरोपित अब भी कार्रवाई के घेरे से बाहर हैं, वहीं गोगरी पीओ ने आरोपितों पर कार्रवाई करने की जगह एक माह बाद डीडीसी से मार्गदर्शन मांगा कि आखिर दोषियों के विरुद्ध क्या क्या कार्रवाई की जाये. खगड़िया : डीएम जय सिंह ने सभी पदाधिकारियों को जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में भ्रष्टाचार के मामले […]

मनरेगा के आरोपित अब भी कार्रवाई के घेरे से बाहर हैं, वहीं गोगरी पीओ ने आरोपितों पर कार्रवाई करने की जगह एक माह बाद डीडीसी से मार्गदर्शन मांगा कि आखिर दोषियों के विरुद्ध क्या क्या कार्रवाई की जाये.

खगड़िया : डीएम जय सिंह ने सभी पदाधिकारियों को जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में भ्रष्टाचार के मामले में त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश कुछ दिन पहले ही दिया था. पदाधिकारी/कर्मियों के विरुद्ध चल रहे मामलों को देर किये बगैर संबंधित विभाग को प्रतिवेदन भेजने का निर्देश जारी किया गया था. लेकिन ऐसा लगता है कि डीएम के इस आदेश का असर डीडीसी के कार्यालय पर नहीं हुआ है, तभी तो भ्रष्टाचार प्रमाणित हो जाने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ पत्राचार हो रही है.
निगरानी विभाग पटना की जांच में यह बातें प्रमाणित हो चुका है तथा इस मामले में कार्रवाई के आदेश साढ़े तीन माह पूर्व ही दिये जा चुके हैं.लेकिन हैरानी की बात यह है कि निगरानी विभाग की जांच रिपोर्ट तथा लोकायुक्त पटना के आदेश के बावजूद अब तक दोषी मनरेगा के अभियंता, कर्मी एवं पंचायत के मुखिया के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई है.
कार्रवाई के नाम पर अब तक डीडीसी व पीओ गोगरी के बीच पत्राचार जरूर हुए हैं.
कब क्या हुआ
बताते चलें कि गोगरी पंचायत के पूर्व मुखिया वकील यादव की शिकायत पर पूरे मामले की जांच लोकायुक्त पटना के द्वारा निगरानी विभाग से कराई गई. जांच में अनियमितता सामने आने के बाद डीडीसी को छह जून 2016 को गोगरी के तत्कालीन पीओ दिलीप कुमार, सहायक अभियंता कृष्ण कुमार चौधरी, कनीय अभियंता राजेन्द्र प्रसाद साहु एवं दो पंचायत रोजगार सेवक कौशल किशोर तिवारी एवं अमरेन्द्र कुमार सहित पंचायत के तत्कालीन मुखिया उमेश प्रसाद पटेल के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश के आलोक में डीडीसी अब्दुल बहाव अंसारी ने 26 जून 2016 को गोगरी पीओ को उक्त सभी आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा,
लेकिन डीडीसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन सभी आरोपितों पर क्या कार्रवाई की जाए. जिसके कारण गोगरी पीओ ने आरोपितों पर कार्रवाई करने की जगह एक माह बाद डीडीसी से मार्गदर्शन मांगा कि आखिर दोषियों के विरुद्ध क्या क्या कार्रवाई की जाए.
नहीं मिला पीओ को मार्गदर्शन
पीओ ने दो अगस्त को ही डीडीसी को पत्र लिखकर इस मामले में स्पष्ट मार्गदर्शन मांगा था. लेकिन 54 दिन बीत गए अब भी पीओ को डीडीसी के द्वारा मार्गदर्शन नहीं भेजा गया है. यहां बताते चले कि मार्गदर्शन मांगे जाने के पूर्व कार्रवाई को लेकर डीडीसी ने 33 दिनों में तीन पत्र पीओ को लेखे थे. लेकिन डेढ़ माह से अधिक समय बीत गए है. अब भी जिलास्तर से पीओ को कार्रवाई संबंधी स्पष्ट पत्र नहीं भेजे गए हैं.

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