विस्थापितों को मिलेगा अर्जित भूमि पर दखल

खगड़िया : गंगा कटाव से विस्थापित 48 परिवारों को प्रशासन द्वारा अर्जित भूमि पर दखल कब्जा दिलाने के लिए भूमि की मापी करायी जा रही है. परबत्ता प्रखंड मुख्यालय के सामने बीते तीन दिनों से भूमि की पैमाइस की जा रही है. भूमि मापी के लिए बेलदौर अंचल के अमीन की प्रतिनियुक्ति की गयी है. […]

खगड़िया : गंगा कटाव से विस्थापित 48 परिवारों को प्रशासन द्वारा अर्जित भूमि पर दखल कब्जा दिलाने के लिए भूमि की मापी करायी जा रही है. परबत्ता प्रखंड मुख्यालय के सामने बीते तीन दिनों से भूमि की पैमाइस की जा रही है. भूमि मापी के लिए बेलदौर अंचल के अमीन की प्रतिनियुक्ति की गयी है.

क्या है मामला
प्रखंड में वर्ष 1977-78 में गंगा कटाव से विस्थापित परिवारों द्वारा कानूनी लड़ाई जीतने के बावजूद अब तक पुनर्वासित करने की दिशा में कोई पहल नहीं की गयी थी. इस कटाव में श्रीरामपुर ठुट्ठी, सिराजपुर, तेमथा, नौरंगा, राका, रुपौहली गांव के हजारों परिवार विस्थापित हुए थे. इसमें से दर्जनों परिवार अभी भी अपने लिये स्थायी आशियाने की चाहत में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की देहरी पर टिके हुए हैं. इनमें से परबत्ता पंचायत के रुपौहली गांव के 48 परिवारों को अभी भी व्यवस्थित रूप से बसाया जाना बांकी है.
इसके लिये जिला प्रशासन के द्वारा मौजा परबत्ता इंग्लिश खेसरा 126, 128 तथा 91 में चार एकड़ 62 डिसमिल भूमि को अर्जित किया गया. इस भू अर्जन के विरुद्ध उच्च न्यायालय में कई मामले चलाये गये.
अंततः जिला भू अर्जन खगड़िया में वाद संख्या 77/81-82 की सुनवाई के उपरांत पारित आदेश में सभी 48 समर्थ विस्थापित परिवारों को बसाने की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया गया. इस आदेश के परिणाम स्वरूप 19 सितंबर 16 को समर्थ परिवारों के द्वारा भूमि के मुआवजा के रूप में 11 लाख 34 हजार 8 सौ 42 रुपये जमा किया गया.
इसके पश्चात फिर से कानूनी दांव पेंच का खेल शुरू हुआ. इस दौरान लगभग दो दर्जन विस्थापित परिवारों ने भूमि पर अपना दखल जमा लिया. इसके साथ ही प्रशासनिक उदासीनता का लाभ उठाते हुए विस्थापितों की सूची से बाहर कई अवांछित लोगों ने भी भूमि पर दखल बना लिया, जबकि दो दर्जन से अधिक परिवारों को अभी भी प्रशासन के द्वारा विधिवत दखल दिलाने बाट जोह रहे हैं. इन समर्थ परिवारों में शिव शंकर भगत, सियाराम भगत, छेदी दास, शेख इरफान, शेख ईसा, शेख मूसा आदि के परिवारों के नाम शामिल हैं.
पहले भी हुई है मापी
विस्थापित परिवारों को प्रशासन द्वारा अर्जित भूमि पर दखल दिलाने के लिए यह पहला प्रयास नहीं है. इससे पहले भी कई बार मापी करायी गयी है, लेकिन प्रशासनिक हलका के पर्याप्त रुचि नहीं लेने की वजह से यह कार्य परिणति तक नहीं पहुंच सका. गोगरी एसडीओ संतोष कुमार के आदेश से 2013 में भी मापी करायी गयी थी. इस मापी के दौरान विधि व्यवस्था के लिए दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति भी की गयी थी, लेकिन फलाफल शून्य ही रहा.
कहते हैं सीओ
सीओ शिव शंकर गुप्ता ने बताया कि मापी करायी जा रही है. मापी पूर्ण होने पर दखल दिलाने की प्रक्रिया करायी जायेगी.

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