खगड़िया : अगर आप बाजार से खुला मसाला खरीद कर खाते हैं, तो आपके लिए बुरी खबर है. हो सकता है, जो मसाला आप खा रहे हैं, वो मिलावटी हो, क्योंकि मसालों में मिलावट का खेल शहर में बड़े पैमाने पर चल रहा है. अभी तक मिलावट के बारे में बड़े शहरों से खबरें आती थीं, लेकिन इस बार हम-आपके बीच से मिलावट की बात सामने आयी है. अभी तक इसको लेकर चर्चा होती थी, लेकिन जिस तरह की तस्वीरें सामने आयी हैं. वो हैरान करने वाली हैं.
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खगड़िया : अगर आप बाजार से खुला मसाला खरीद कर खाते हैं, तो आपके लिए बुरी खबर है. हो सकता है, जो मसाला आप खा रहे हैं, वो मिलावटी हो, क्योंकि मसालों में मिलावट का खेल शहर में बड़े पैमाने पर चल रहा है. अभी तक मिलावट के बारे में बड़े शहरों से खबरें आती […]

50 फीसदी तक मिलावट : बाजार के जानकारों का कहना है कि मसालों में 50 फीसदी तक मिलावट की जाती है. जिन स्थितियों में ये मिलावट होती है, वह भी भयावह है. वहां किसी तरह की शुद्धता का ख्याल नहीं किया जाता. जो मजदूर ये काम करते हैं, वो चप्पल पहन कर मसालों के आसपास व उसके बीच में चलते रहते हैं. उसी को बाद में बाजार में भेज दिया जाता है.
10-15 फीसदी जलन : मसालों को बारीक पीसा जाता है. ऐसे में पीसने के दौरान 10-15 फीसदी तक मसाला कम हो जाता है. अगर कोई खड़ा मसाला 100 किलो होता है, तो उसमें पिसा मसाला 85 से 90 किलो के बीच निकलता है.
कहते हैं चिकित्सक
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पवन कुमार ने बताया कि मिलावटी मसाला कई बीमारियों की जड़ है. पेट संबंधी बीमारी में इसकी अहम भूमिका है. गैस, पेप्टिक अल्सर व लीवर के लिये खतरनाक है. अशुद्ध मसाला व अन्य अमानक खाद्य सामग्री के सेवन से कैंसर व डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है. वहीं शुद्ध मसाला स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है.
खड़ा मसाला महंगा, पिसा सस्ता
चौकानेवाली बात यह है कि बाजार में जो खुला मसाला बिकता है. उसमें खड़ा मसाला महंगा व पिसा मसाला सस्ता बिकता है. अगर मसाला शुद्ध हो, तो ये कैसे हो सकता है? ये बड़ा सवाल है, क्योंकि खड़ा मसाला पीस कर ही पिसा मसाला बनता है. ऐसे में बिना मुनाफे के कोई दुकानदार कैसे आपको घाटे में मसाला दे सकता है. ये बाजार के गणित से भी उल्टा है. ऐसे में शक होना स्वाभाविक है.
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