कोसी के जलस्तर में वृद्धि से डुमरी पुल की मरम्मती पर छाये संकट के बादल
जुगाड़ पुल पर गुजरना खतरे से खाली नहीं, हादसे की आशंका से सहमे राहगीर
कोसी में आवाजाही रूकने से 50 लाख की आबादी के आवागमन की रफ्तार पर लग सकता है ब्रेक
जुगाड़ पुल की दयनीय स्थिति को देखते हुए भारी वाहनों की आवाजाही पर लगा है प्रतिबंध
खगड़िया/बेलदौर : बीते पांच वर्षोँ से आवागमन का संकट झेल रहे कोसी इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली है. कोसी के जलस्तर में हुए बढ़ोत्तरी ने आमजनता से लेकर अधिकारियों की नींद हराम कर दी है. कोसी की फुफकार के आगे डुमरी पुल के क्षतिग्रस्त पाये के निर्माण की रफ्तार भी थम सकती है.
इधर, नावों के जोड़ कर बनाये गये जुगाड़ पुल भी अंतिम सांसे ले रहा है. जुगाड़ पुल की दयनीय स्थिति के कारण प्रशासन ने भले ही जुगाड़ पुल पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दिया हो लेकिन इससे बेफिक्र लोडेड बड़े वाहनों की आवाजाही किसी अनहोनी को आमंत्रण दे रहा है.
वर्षों से सिसक रही लाखों की आबादी
31 जुलाई 2015 तक क्षतिग्रस्त डुमरी पुल पर अस्थाई रूप से दो पहिया वाहन एवं पांव पैदल आवागमन से लोगो को काफी राहत थी, लेकिन डुमरी पुल के मरम्मति कार्य प्रारंभ कराने में बिना वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था किये ही इसे रोक दिया गया. जबकि इसके पूर्व ही 23 जुलाई 2014 को प्रदेश सरकार द्वारा बनायी गयी स्टील ब्रिज का लगभग 170 मीटर भाग पानी मे बह जाने से आवागमन की संकट उत्पन्न हो गया.
कभी नाव से तो कभी नाविको द्वारा बनाये गये नाव पुल पर शोषण का शिकार होकर नदी पार करने को विवश लोग व्यवस्था को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं.
भारी वाहनों का परिचालन जारी : जुगाड पुल पर भारी वाहनों के परिचालन पर अधिकारियों द्वारा लगाये गये रोक का अनुपालन नहीं हो रहा है. ऐसे में अनहोनी की आशंका हर वक्त मंडरा रहा है. पुल के दोनों ओर चौकीदारों की प्रतिनियुक्ति कर संबंधित थाना को जुगाड़ पुल पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी के अनुपालन का निर्देश दिया गया है. रविवार को पुल पर धड्डले से मक्का लदे टैक्टर व भारी वाहनों की आवाजाही जुगाड़ पुल होकर हो रहे थे.
जानकारों की मानें तो जुगाड पुल पर परिचालन बंद होने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. नाव पुल संचालक परिचालन की समयावधि बढाने के लिऐ हरसंभव कोशिश में जुटे हैं. लेकिन यह खतरे से खाली नहीं होगा.
डुमरी पुल पर िटकी है लाखों जिंदगी
बीपी मंडल सेतु का निर्माण के बाद इलाके के समृद्धि को नया आयाम मिलने की उम्मीद जगी थी. 29 अगस्त 1992 को तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने पुल का उदघाटन किया था. इधर, कोसी की लीला के आगे पुल क्षतिग्रस्त हो गया. 29 अगस्त 2010 को पुल का पाया नंबर 17 ,18 एवं 19 धंसने से पुल पर परिचालन बंद कर दिया गया. 31 मार्च 2015 तक अस्थाई रूप से क्षतिग्रस्त पुल पर दो पहिया व पांव पैदल लोगो का आवागमन होता रहा.
एक अप्रैल को बगैर वैक्लपिक व्यवस्था किये ही कार्य एजेंसी ने आवागमन ठप कर पुल के क्षतिग्रस्त 290 मीटर भाग को तोडकर हटा दिया. इसके बाद करोड़ों की लागत से स्टील पाइल ब्रिज का निर्माण हुआ जो कोसी की तेज धारा के आगे टिक नहीं सका. इसके बहने के साथ ही एक बार फिर आवागमन पर संकट उत्पन्न हो गया. इसके बाद से जुगाड़ के सहारे कोसी की लाखों की आबादी रेंग रही है.
लाइफलाइन को कब मिलेगा ऑक्सीजन
कोसी की लाइ्फलाइन बीपी मंडल सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद फरकिया के इस इलाके को अभिशाप से मुक्ति कब मिलेगी यह जानने के लिये जनता बेताब है लेकिन आश्वासन की घुट्टी पिला जनता को वर्षों से ठगा जा रहा है. डुमरी पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद कितने पुल का निर्माण हो गया है लेकिन इसके क्षतिग्रस्त भाग की मरम्मती तक पूरी नहीं हो पायी है. लिहाजा जुगाड़ तकनीक के सहारे रेंग रही कोसी की गोद में बसे लोगों की जिंदगी सिसकने को विवश हैं.
