खगड़िया: जिले में लगभग दो हजार मरीज एचआइवी से पीड़ित हैं. पर, सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि सभी एचआइवी पीड़ितों को नहीं मिल रही है. मरीज को या तो प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी नहीं है अथवा जिला प्रशासन एचआइवी पीड़ितों को प्रोत्साहन राशि देने में रुचि नहीं दिखा रहा है. यही कारण है कि जिले के 185 मरीजों को ही मुश्किल से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करायी जा रही है.
क्या है एचआइवी संक्रमित पीड़ितों के लिए योजना
राज्य सरकार द्वारा एचआइवी पीड़ितों के प्रोत्साहन के लिए कई योजनाएं चलायी गयी हैं. पर, मरीजों को उसकी जानकारी ही नहीं है. इसका का नतीजा है कि अब तक मुश्किल से 185 लोगों को ही योजना का लाभ मिल पा रहा है.
सरकार द्वारा एचआइवी पीड़ितों के भरण-पोषण के लिए बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना के तहत प्रति माह 15 सौ रुपये सहायक राशि दी जाती है. वहीं परवरिश योजना के तहत एचआइवी संक्रमित एवं प्रभावित बच्चों के भरण-पोषण एवं शिक्षा के लिए जन से लेकर छह वर्ष तक की आयु के बच्चों को प्रति माह नौ सौ रुपये तथा 18 वर्ष की आयु के बच्चों को एक हजार रुपये सहायक राशि दी जाती है. इतना ही नहीं एचआइवी पीड़ितों को अंत्योदय अन्न योजना, महात्मा गांधी, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना तथा बिहार शताब्दी असंगठित कामगार एवं सिल्पगार सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ दिया जाता है.
पीड़ितों में जागरूकता का है अभाव
एचआइवी पीड़ितों को जानकारी नहीं रहने के कारण योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ता है.
इसके साथ ही साथ वे ठीक से इलाज भी नहीं करा पाते हैं. जिला एड्स नियंत्रण इकाई द्वारा प्रचार-प्रसार में रुचि नहीं दिखायी जाती है. यही कारण है कि दर्जनों एचआइवी पीड़ित इलाज के नाम पर गुमराह हो रहे हैं.
बढ़ रही है एचआइवी पीड़ितों की संख्या
जिले में एचआइवी पीड़ितों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. मरीजों की बढ़ती संख्या को देख सदर अस्पताल में पहले लिंक एआरटी सेंटर खोला गया था. आवश्यकता बढ़ते ही उसे एआरटी सेंटर में बदल कर व्यवस्थित किया गया है.
पांच जिलों के पीड़ितों का होता है इलाज
एचआइवी से पीड़ित पांच जिलों के मरीजों का इलाज खगड़िया के एआरटी सेंटर में किया जाता है. एआरटी सेंटर के परामर्शी अभिलाष कुमार ने बताया कि इस सेंटर में, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, बेगूसराय के सीमावर्ती क्षेत्र, समस्तीपुर के सीमावर्ती क्षेत्र के मरीजों का इलाज किया जाता है.
पीड़ितों को भरती करने की सुविधा नहीं
एचआइवी से पीड़ित मरीज को एआरटी सेंटर में भरती करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है. भरती करने की नौबत आने पर मरीज को सीसी सेंटर भागलपुर, पटना व हाजीपुर भेजा जाता है.
बोले नोडल पदाधिकारी
नोडल पदाधिकारी डॉ रंजन कुमार ने बताया कि सीसी सेंटर मेडिकल कॉलेज में ही बनाया जाता है. फिलहाल एआरटी सेंटर पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है. सभी प्रकार की दवा उपलब्ध है. सीडी 4 जांच मशीन के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है.
