फोटो है 15 मेंकैप्सन – खेतो में रखा दानाविहिन ठठेर प्रतिनिधि, बेलदौरमक्का उत्पादन के लिए मशहूर बेलदौर प्रखंड के किसानों को दाना के बदले ठठेर की उपज हुई है. अब किसानों को महाजनों के कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है. फसल क्षतिपूर्ति भी किसानों को नहीं मिल रही है. प्रखंड क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ खेतों में मक्का फसल की कटनी की जा रही है. पर, फसल कटनी कर रहे किसानों के चेहरे पर खुशी की जगह चिंता की लकीर साफ दिख रही है. पहले गेहूं में दाना नहीं रहने से किसान मायूस थे, अब ठठेर के बोझ में भुट्टा नहीं देख किसानों के चेहरे का रंग उड़ गया है. बेला के किसान अरुण यादव ने बताया कि दो एकड़ मेंे लगी गेहूं की बालियों से दाना गायब हो गया. अब रही सही कसर आंधी-तूफान एवं ओलावृष्टि के कहर ने पूरी कर दी. मक्के के ठठेर में भुट्टा है, लेकिन दाने के लाले पड़े हैं. उन्होंने बताया कि खेती मंे 20-25 हजार प्रति बीघा खर्च हुआ. उम्मीद थी फसल अच्छी होगी, तो भविष्य के संजोये सपने को पूरा करेंगे एवं महाजनों का कर्ज भी उतारेंगे. अब ठठेर बेच कर महाजनों का कर्ज कैसे उतारेंगे. काफी जद्दोजहद कर क्षतिपूर्ति का आवेदन जमा हो पाया. पर, महज कागजी खानापूर्ति कर दी जानेवाली कुछ रुपये की सूचना से बची खुची आस भी टूट गयी. यही हाल रोहियामा के जितेंद्र ठाकुर, जितेंद्र वर्मा, सकरोहर चक्रमणिया गांव के सुधीर मंडल, बेचेंद्र कुमार सिंह समेत सैकड़ों किसानों का है. इनकी 80 फीसदी से अधिक मक्का की फसल आंधी-तूफान में समय पूर्व गिर कर बरबाद गयी. बावजूद फसल क्षतिपूर्ति वितरण में भू लगान रसीद के गणितीय आंकड़ेबाजी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. इससे किसान आहत हैं.
ठठेर बेच किसान कैसे चुकायेंगे महाजन का कर्ज
फोटो है 15 मेंकैप्सन – खेतो में रखा दानाविहिन ठठेर प्रतिनिधि, बेलदौरमक्का उत्पादन के लिए मशहूर बेलदौर प्रखंड के किसानों को दाना के बदले ठठेर की उपज हुई है. अब किसानों को महाजनों के कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है. फसल क्षतिपूर्ति भी किसानों को नहीं मिल रही है. प्रखंड क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ […]
