आवेदक ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की खगड़िया शाखा द्वारा वर्ष 9-10 के तहत 24 जुलाई 2014 को बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय से नौ बिंदुओं पर सूचना मांगी थी. जिसमें किसान गोल्ड ऋण का लाभ प्राप्त करने वाले किसानों की सूची ऋण की स्वीकृति देने वाले तथा ऋण आवेदन की जांच करने वाले बैंक कर्मियों के नाम, किसानों से की गयी राशि वसूली शामिल था.
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खगड़िया: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा, खगड़िया के बहुचर्चित किसान गोल्ड ऋण मामले की सुनवाई अब केंद्रीय सूचना आयोग करेगा. सुनवाई केंद्रीय सूचना आयुक्त सरत सबरवाल करेंगे. सुनवाई वीडियो कॉफ्रेंस के माध्यम से छह मई को होगी. सुनवाई के दौरान केंद्रीय सूचना आयुक्त ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय सहरसा के वरिष्ठ क्षेत्रीय […]

खगड़िया: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा, खगड़िया के बहुचर्चित किसान गोल्ड ऋण मामले की सुनवाई अब केंद्रीय सूचना आयोग करेगा. सुनवाई केंद्रीय सूचना आयुक्त सरत सबरवाल करेंगे. सुनवाई वीडियो कॉफ्रेंस के माध्यम से छह मई को होगी. सुनवाई के दौरान केंद्रीय सूचना आयुक्त ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय सहरसा के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक व आवेदक शैलेंद्र सिंह तरकर को अपने जिले के एनआइसी कक्ष में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था.
सूचना नहीं मिलने पर आवेदक ने बैंक के प्रधान कार्यालय मुंबई में द्वितीय अपील दायर किया था. इस पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रधान कार्यालय में पदस्थापित महाप्रबंधक अनिल मल्होत्र ने 11 दिसंबर 2013 को ही आवेदक को मांगी गयी सभी सूचनाएं 15 दिनों में उपलब्ध कराने का निर्देश कार्यालय सहरसा के लोक सूचना पदाधिकारी को दिया था. हालांकि सूचना नहीं दी गयी, जिस पर आवेदक ने केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर किया था. इधर, इस मामले की सुनवाई की तिथि निर्धारित की गयी है.
आखिर क्या है पूरा मामला
वर्ष 09-10 में सेंट्रल बैंक के द्वारा 84 किसानों को किसान गोल्ड ऋण का लाभ दिया गया. इतने किसानों करोड़ों रुपये ऋण के रुप में दिये गये थे. इनमें अधिकांश किसानों को फर्जी कागजात के आधार पर ऋण की स्वीकृति दी गयी थी. इस बात का खुलासा जांच के बाद हुआ था. अलौली के एक शिकायत कर्ता दीपक कुमार अकेला की शिकायत पर आर्थिक अपराध इकाई ने सीबीआइ द्वारा दी गयी किसान गोल्ड ऋण योजना की गयी. जांच में यह बातें सामने आयी थी कि 84 के विरुद्ध 54 किसानों को फर्जी एलपीसी, लगान रसीद के आधार पर किसान गोल्ड ऋण योजना की स्वीकृति दी गयी थी तथा इन किसानों के जमीन के कागजात की जांच बैंक द्वारा नहीं करायी गयी थी. इसके बाद आर्थिक, अपराध इकाई ने पटना में 19 मई 2012 को कांड संख्या 3/12 दर्ज करायी, फर्जी किसान गोल्ड ऋण की स्वीकृति देने के मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक, सहायक शाखा प्रबंधक, बैंक के सिंगल एडभाइजर , बिचौलियों सहित 59 किसानों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. जानकारी के मुताबिक अनुसंधान में आरोप सत्य पाये जाने के बाद अनुसंधान कर्ता ने इन आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र भी समर्पित कर दिया था. इसी मामले की जानकारी आवेदक ने आरटीआइ के तहत मांगी थी. जिसकी सुनवाई छह मई को केंद्रीय सूचना आयुक्त सरत सबरबाल करेंगे .