परबत्ता. प्रखंड में पंचायतों का पुनर्गठन नहीं होने व किसी भी प्रकार की योजना की राशि का सभी पंचायतों के बीच समान वितरण से यह स्थिति उत्पन्न हुई है. प्रखंड में विभिन्न प्रकार की विकास व कल्याणकारी योजनाओं का पंचायतों के बीच वितरण में समान रुप से राशि दी जाती है. ऐसे में अधिक जनसंख्या वाले पंचायतों में राशि कम पड़ जाती है. इस वितरण में पंचायतों के क्षेत्रफल का भी ध्यान नहीं रखा जाता है. इसके अलावा गत डेढ दशक में दूर-दराज के गांवों से बाजार के निकट बसने की बढ़ती हुई प्रवृत्ति से भी प्रखंड मुख्यालय के पंचायत पर आबादी का भार तेजी से बढ़ा है. पंचायतों की जनसंख्या के आंकड़ों को देखने से भी यह स्पष्ट हो जाता है कि विभिन्न पंचायतों के बीच बड़ा फासला है. वर्ष 2001 में हुए पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों का पुनर्गठन हुआ था. राज्य की पूर्व की सरकार ने निर्णय लिया था कि वर्ष 2011 में होने वाली जनगणना के आधार पर ही पंचायतों का पुनर्गठन होगा. वर्ष 2013 में राज्य सरकार ने इस बाबत की घोषणा भी किया था, लेकिन वर्ष 2014 में राज्य सरकार अपने इस वादे से मुकर गयी. दिसंबर 2014 में पंचायती राज विभाग के मंत्री विनोद प्रसाद यादव ने कहा कि अब 2025 में पंचायतों का पुनर्गठन होगा. बहरहाल वर्ष 2011 में हुए जनगणना के अनुसार पंचायतवार जनसंख्या निम्न प्रकार से है.कोलवारा -17315,परबत्ता -16789, महदीपुर-15523, पिपरा लतीफ -15121, सौढ दक्षिणी 14195 , कुल्हरिया-13035, सियादतपुर अगुवानी-12980, जोरावरपुर -12669, लगार- 12427, देवरी -11970 , कवेला -11136, सौढ़ उत्तरी -10627 , मधवपुर -10236 , खजरैठा -10072 ,रामपुर उर्फ रहीमपुर -9551, वैसा -9208, बंदेहरा -8787, गोविन्दपुर -7168, भरसो -6884, तेमथा करारी -6509 , दरियापुर भेलवा -6195,खीड़ाडीह -5669.
जनसंख्या की विसंगति से पीडि़त है कई पंचायत
परबत्ता. प्रखंड में पंचायतों का पुनर्गठन नहीं होने व किसी भी प्रकार की योजना की राशि का सभी पंचायतों के बीच समान वितरण से यह स्थिति उत्पन्न हुई है. प्रखंड में विभिन्न प्रकार की विकास व कल्याणकारी योजनाओं का पंचायतों के बीच वितरण में समान रुप से राशि दी जाती है. ऐसे में अधिक जनसंख्या […]
