खगड़िया: कई वर्षो के बाद खगड़िया जिला आरटीपीएस में नंबर बन हुआ है. राज्य स्तर से जारी सभी जिलों के रैकिंग में खगड़िया सबसे ऊपर यानी पहले नंबर पर है. पांच वर्ष में यह उपलब्धि खगड़िया जिला को पहली बार प्राप्त हुआ . इसके पूर्व वर्ष 2013 में यह जिला चौथे तथा पिछले माह पांच वें स्थान पर था. जानकार बताते हैं कि आरटीपीएस काउंटर पर बेहतर व्यवस्था ससमय आवेदनों का निष्पादन, ससमय आवेदकों को सेवा संबंधी सूचना देना, समय पर प्रात एवं निर्गत आवेदनों को ऑन लाइन करना सहित अन्य कार्यो का बेहतर निष्पादन के कारण ही आरटीपीएस में यह जिला नंबर बन बना है.
कार्रवाई का हुआ असर
यह जिला आरटीपीएस में ऐसे ही नंबर बन नहीं बना हैं. नंबर बन बनाने में निचले से लेकर वरीय पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. अक्तूबर नंबर माह में इस जिले की स्थिति काफी बदतर थी. राज्य स्तर पर 31 वां स्थान इस जिले का था. जिसके बाद इसकी स्थिति सुधारने की कवायद शुरू की गयी.
वरीय पदाधिकारी के द्वारा शो मोटो अपील लेकर लापरवाह पदाधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया है. पिछले माह तक कई बीडीओ पंचायत सचिव से जुर्माना के रुप में 39 हजार रुपये वसूले गये. क्योंकि इनके स्तर पर लापरवाही बरती जाती थी. ससमय आवेदनों का निष्पादन नहीं होने के कारण लगातार आरटीपीएस की स्थिति खराब हो रही थी. कार्रवाई के बाद अचानक स्थिति में बदलाव हुई है.
गोगरी की स्थिति सुधरी
गोगरी अनुमंडल की स्थिति पहले अच्छी नहीं थी.जानकार बताते हैं कि हाल के दिनों में इस अनुमंडल की स्थिति में काफी सुधार आयी है. गोगरी एसडीओ ने कई मामलों में स्वत: संज्ञान लेकर प्रथम अपील वाद खोला है. तथा कई लापरवाह लोक सेवकों पर जुर्माना लगाया है. हाल के दिनों मे ही उन्होंने कई पंचायत सचिव एवं बीडीओ पर करीब 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया. इन्होंने ऐसे पदाधिकारी तथा कर्मी पर अर्थदंड लगाया है. जिन्होंने ससमय आवेदनों का निष्पादन नहीं किया था.
कई पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण
आरटीपीएस में सुधार के लिए वरीय पदाधिकारी के द्वारा लगातार निचले पदाधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है. आरटीपीएस के तहत प्राप्त आवेदनों का ससमय निष्पादन नहीं करने वाले कई पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है. मिली जानकारी के मुताबिक डीएम राजीव रोशन ने डीटीओ, गोगरी, अलौली, परबत्ता व बेलदौर बीडीओ के साथ साथ मुख्यालय डीएसपी, अलौली तथा बेलदौर के सीओ से स्पष्टीकरण मांगा है. सूत्र के मुताबिक आठ प्रतिशत से अधिक आवेदनों का इन पदाधिकारियों के द्वारा ससमय आवेदनों का निष्पादन नहीं किया गया था, जिसे गंभीरता से लेकर डीएम ने इन पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है. ज्ञात हो कि ससमय आवेदनों का निष्पादन नहीं करने वाले कई पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण तथा उन पर अर्थदंड लगाया गया है.
