शिक्षक ने दी थी झूठी जानकारी

खगड़िया: अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने के लिए एक व्यक्ति ने झूठी जानकारी दी थी. इसी झूठी जानकारी के आधार पर वे शिक्षक बने और 24 वर्ष से शिक्षक बन कर सेवा कर रहे है. वरीय उपसमाहर्ता सुधीर कुमार के जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि कन्या मध्य विद्यालय, बेलदौर में […]

खगड़िया: अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने के लिए एक व्यक्ति ने झूठी जानकारी दी थी. इसी झूठी जानकारी के आधार पर वे शिक्षक बने और 24 वर्ष से शिक्षक बन कर सेवा कर रहे है. वरीय उपसमाहर्ता सुधीर कुमार के जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि कन्या मध्य विद्यालय, बेलदौर में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में कार्यरत शिक्षक श्रवण कुमार सिंह को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली है. जबकि इन्होंने नौकरी पाने के लिए झूठी जानकारी विभाग को दी थी.

जांच रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि कुछ महत्वपूर्ण सूचना को छुपाकर इन्होंने अनुकंपा के आधार पर नौकरी पायी है.

अगर ये इन सूचनाओं को नहीं छुपाते तो शायद इन्हें नौकरी नहीं मिलती. शिक्षक श्रवण कुमार सिंह के विरुद्ध पीरनगरा निवासी रविशंकर कुमार ने शिकायत की थी कि ये अपने जीवित पिता को मृत बताकर अनुकंपा के आधार पर नौकरी कर रहे है. हालांकि जब जांच हुई तो यह शिकायत गलत साबित हुई. जांच में यह बातें सामने आयी कि शिक्षक श्री सिंह अपने पिता बल्कि माता की मृत्यु के उपरांत उन्हें अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी. लेकिन जांच में यह महत्वपूर्ण बातें सामने आयी कि इस शिक्षक ने गलत व साक्ष्य को छुपाकर नौकरी पायी थी. विभागीय सूत्र के मुताबिक जांच पदाधिकारी ने डीएम को रिपोर्ट भेजी है.

दी थी गलत जानकारी : विभागीय सूत्रों के मुताबिक युक्त शिक्षक के माता व पिता दोनों सरकारी नौकरी में थे. इनके माता की मृत्यु सेवाकाल के दौरान ही वर्ष 1983 में हो गयी थी, जिसके बाद इनके पुत्र ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए 1985 में आवेदन दिया था. सारी प्रक्रिया पूरी कर आवेदक श्रवण कुमार सिंह को 28 अगस्त 1991 को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पत्र दिया गया. सूत्र के मुताबिक नियुक्ति के दौरान इस शिक्षक के पिता भी सरकारी सेवा में थे, लेकिन इसकी सूूचना इन्होंने अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने के लिए दिये आवेदन में नहीं दी. जांच पदाधिकारी सुधीर कुमार ने जांच रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है कि अनुकंपा पर चयन से संबंधित सामान्य प्रशासन पटना द्वारा 12 जुलाई 1977 को जारी सकरुलर के मुताबिक मृतक सरकारी सेवक के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो, यानी उस परिवार को कोई भी सदस्य जीविकोपाजर्न का कार्य न करता हो अगर करता भी हो तो उसकी आमदनी पूरे परिवार के भरन पोषण के लिए अपर्याप्त हो. तभी उस परिवार को यह सहूलियत दी जानी है. जांच पदाधिकारी ने यह भी कहा हि विभागीय सकरुरर के मुताबिक यदि उस परिवार में किन्ही को पहले से ही नौकरी प्राप्त है तो इसकी भी सूचना देनी पड़ती है. जबकि उक्त शिक्षक ने अनुकंपा के आधार पर दिये गये आवेदन में पिता की नौकरी की बातें छुपाई है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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