आरटीपएस: ऑन लाइन में बिचौलिया सक्रिय

जिला प्रशासन की सक्रियता से ऑफ लाइन में हुआ सुधारप्रतिनिधि, खगडि़या लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम में पारदर्शिता लाने के लिए जिला प्रशासन डाल-डाल तो बिचौलिया पात-पात है. कई आरटीपीएस काउंटर पर ऑफ लाइन के जरिये जाति, आय व आवासीय प्रमाण का आवेदन जमा करने में हद तक पारदर्शिता आयी है, लेकिन अब बिचौलिया आन […]

जिला प्रशासन की सक्रियता से ऑफ लाइन में हुआ सुधारप्रतिनिधि, खगडि़या लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम में पारदर्शिता लाने के लिए जिला प्रशासन डाल-डाल तो बिचौलिया पात-पात है. कई आरटीपीएस काउंटर पर ऑफ लाइन के जरिये जाति, आय व आवासीय प्रमाण का आवेदन जमा करने में हद तक पारदर्शिता आयी है, लेकिन अब बिचौलिया आन लाइन में सक्रिय हो चुके हैं. प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा विभिन्न आरटीपएस में निरीक्षण किये जाने से आरटीपएस कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है. इसके कारण ऑफ लाइन के जरिये बिचौलिया द्वारा आवेदन जमा करने की गुंजाइश खत्म हो चुकी है. हालांकि, कुछेक अंचल इसके अपवाद जरूर हैं. पिछले महीने खगडि़या एसडीओ द्वारा निरीक्षण किये जाने से आरटीपीएस में सुधार हुआ है. सूत्रों की माने तो बिचौलया ऑफ लाइन की जगह अब आन लाइन का सहारा ले रहे हैं. इसमें बिचौलिया सफल भी हो रहे हैं. अगर अधिकारियों द्वारा प्रत्येक आरटीपीएस में आन लाइन आवेदनों की जांच की जाये तो अनियमितता सामने आ सकती है. मालूम हो कि आन लाइन के जरिये जाति, आय व आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र के लिए स्वयं आरटीपीएस कांउटर पर आना पड़ता है. ताकि, आवेदन व शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवाकर उन्हें प्रमाण पत्र निर्गत किया जा सके. इधर, सूत्रों की माने तो आन लाइन के जरिये बिचौलियों द्वारा बंच में आवेदन किया जाता है और आरटीपीएस कर्मियों की मिली भगत से आवेदन एवं स्वयं शपथ पत्र पर फरजी हस्ताक्षर कर वे प्रमाण पत्र भी हासिल कर लेते हैं.

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