विभागीय लापरवाही: सेवानिवृत्त होने के बाद भी बने हैं प्रभारी एचएम, बच्चों को नहीं बांटी पोशाक राशि

परबत्ता: प्रखंड में शिक्षा विभाग में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां विद्यालय के प्रधानाध्यापक सेवानिवृत्त होने के महीनों बाद भी स्कूल के प्रधान बने हुए हैं, वह भी जबरन. यही नहीं उक्त प्रधान ने विद्यालय के संचालन के साथ-साथ विभिन्न योजनाओं की राशि भी स्कूल के खाते से निकाल रखी है. मामला सौढ़ […]

परबत्ता: प्रखंड में शिक्षा विभाग में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां विद्यालय के प्रधानाध्यापक सेवानिवृत्त होने के महीनों बाद भी स्कूल के प्रधान बने हुए हैं, वह भी जबरन. यही नहीं उक्त प्रधान ने विद्यालय के संचालन के साथ-साथ विभिन्न योजनाओं की राशि भी स्कूल के खाते से निकाल रखी है. मामला सौढ़ दक्षिणी पंचायत के द्रोपदी प्राथमिक विद्यालय नयावास मथुरापुर का है, जहां सेवानिवृत्त होने के बाद भी शिवचंद्र शर्मा प्रभारी प्रधानाध्यापक बने हुए हैं.
नहीं आते स्कूल, घर जाकर शिक्षक बनाते हैं हाजिरी : पंचायत शिक्षक नियोजन इकाई द्वारा शिवचंद्र शर्मा का नियोजन 2006 में प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में हुआ था. कार्यालय को उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उनकी जन्म तिथि 1956 है. जन्मतिथि के आधार पर उनकी सेवानिवृत्त की तिथि 15 नवंबर 2014 होनी चाहिए. नवंबर में जब वह सेवानिवृत्त नहीं हुए, तो विभाग ने उनसे मैट्रिक समेत अन्य प्रमाण पत्रों की मांग की. प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराने पर विभाग ने नियोजन इकाई के सचिव (पंचायत सचिव ) से उनकी जन्मतिथि जाननी चाही, लेकिन पंचायत सचिव ने भी पूर्ण प्रभार नहीं मिलने की बात कह कर मामले को टाल दिया. विभाग ने अपुष्ट साक्ष्य के आधार पर ही कार्रवाई करते हुए दिसंबर का वेतन स्थगित करने का आदेश दिया.

इस दौरान प्रभारी प्रधान ने विद्यालय के खाते से राशि निकासी जारी रखी. जब तक विभाग ने बैंक को खाता संचालन पर रोक लगाने का पत्र दिया, तब तक पोशाक योजना की 74 हजार रुपये प्रधान निकाल चुके थे. इस राशि का भी वितरण नहीं किया गया है. चूंकि वह विद्यालय भी नहीं आते हैं, इसलिए विभाग उनके साथ कोई पत्रचार भी नहीं कर रहा है. वह कई वर्षो से घर से ही विद्यालय संचालन कर रहे हैं तथा अन्य शिक्षकों को भी उनके घर पर जाकर हाजिरी बनानी पड़ती है. शिवचंद्र शर्मा का चयन 34540 शिक्षक के रूप में भी हुआ था, लेकिन घर रहकर विद्यालय के संचालन की सुविधा के कारण उन्होंने वेतनमान को भी छोड़ दिया तथा नियोजित शिक्षक बने रहे.

कहती हैं पंचायत की मुखिया
मुखिया पुष्पा मनुज ने बताया कि संबंधित शिक्षक के नियोजन से संबंधित कागजात पंचायत सचिव के पास है. यह सच है कि शिवचंद्र शर्मा नवंबर, 2014 में ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं. गुरुवार 19 फरवरी को बीइओ अखिलेश कुमार यादव मुखिया व उनके पड़ोसी शिवचंद्र शर्मा से इस बारे में बात करने उनके घर गये, लेकिन प्रभारी प्रधान नहीं मिले. मुखिया ने यह भी बताया कि प्रभारी ने 24 फरवरी को पोशाक राशि वितरण करने का आश्वासन दिया है.
कहते हैं बीइओ
बीइओ अखिलेश कुमार यादव ने कहा कि नियोजन संबंधी अभिलेख नियोजन इकाई के पास संधारित रहने के कारण वस्तुस्थिति का पता नहीं चल पाया, लेकिन कार्यालय में हाल में उपलब्ध हुए कागजात के अनुसार सेवानिवृत्त की तिथि नवंबर 14 मानी जा रही है. इस आधार पर प्रधान के मानदेय व खाता संचालन पर रोक लगा दी गयी है.
रिटायर प्रधान ने नहीं दिया कोई जवाब
इस संबंध मे प्रभारी सेवानिवृत्त प्रधान के मोबाइल नंबर 9798715073 पर संपर्क किया गया, तो उत्तर मिला कि वह बाहर गये हैं तथा बात नहीं हो सकती है. वहीं ग्रामीण सरोवर मंडल तथा सिकंदर मंडल ने बताया कि यह पूरा मामला पदाधिकारी की जानकारी में संचालित हो रहा है. विगत दो वर्षो से लगातार शिकायत किये जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं करना यही संकेत करता है.
कहते हैं पंचायत सचिव
पंचायत सचिव इंद्र कुमार यादव ने बताया कि पूर्व पंचायत सचिव द्वारा आधा अधूरा अभिलेख प्रभार में दिया गया है. मेधा सूची के अनुसार संबंधित शिक्षक को 2012 में ही सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए था. अभी भी शिक्षक द्वारा जन्म प्रमाणपत्र से संबंधित दस्तावेज देने से इनकार किया जा रहा है.

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