चौथम. अटका धान अधिप्राप्ति को लेकर किसान असमंजस की स्थिति में हैं. सरकार द्वारा धान अधिप्राप्ति के लिए समर्थन मूल्य 1360 सहित 300 रुपया बोनस की घोषणा से किसान समर्थन मूल्य पाने के लिए धान को व्यापारियों के हाथ बेचने से परहेज कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर रबी फसल की खेती के लिए पूंजी का अभाव खटकता है. ऐसी स्थिति में किसान उधेड़ बुन में हैं. सरकार की घोषणा व हकीकत के बीच फासले से किसानों में सरकार के प्रति विश्वास घट रहा है. धान अधिप्राप्ति के लिए निर्धारित तिथि की घोषणा प्रशासनिक तौर पर 25 नवंबर से 15 मार्च तक तय किया गया है. धान अधिप्राप्ति शुरू करने की तिथि में एक माह 10 दिन गुजर जाने के बाद भी अधिप्राप्ति शुरू नहीं किया जा सका है. यहां तक की पैक्सों द्वारा धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य की भी घोषणा की जा चुकी है. वहीं अधिप्राप्ति की सारी संशोधित प्रक्रिया का आदेश निर्गत भी किया जा चुका है, लेकिन अधिप्राप्ति शुरू नहीं हुई है. यह बोलने से पदाधिकारी भी परहेज कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार एफसीआइ धान अधिग्रहण के मूड में नहीं है. ऐसी परिस्थिति में अधिप्राप्ति के द्वारा संग्रहित धान को कहां और कैसे भंडारण किया जाये. यह एक समस्या बनी है.
धान अधिप्राप्ति की वाट जोह रहे किसान
चौथम. अटका धान अधिप्राप्ति को लेकर किसान असमंजस की स्थिति में हैं. सरकार द्वारा धान अधिप्राप्ति के लिए समर्थन मूल्य 1360 सहित 300 रुपया बोनस की घोषणा से किसान समर्थन मूल्य पाने के लिए धान को व्यापारियों के हाथ बेचने से परहेज कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर रबी फसल की खेती के लिए पूंजी […]
