कोढ़ा रमजान का चांद नजर आने के बाद शनिवार को मुस्लिम समुदाय ने पहली रोजा रखी. इस दौरान कोढ़ा प्रखंड के गेड़ाबाड़ी, कोलासी, मूसापुर, रौतारा बाजार सहित कई इलाकों में रमजान की रौनक रही. बाजार में इफ्तार, सहरी की खरीदारी के लिए चहल-पहल रही. हालांकि कई स्थानों पर सस्ता सामान भी उपलब्ध था. जिससे रोजेदारों को सहूलियत मिली. रोजेदारों ने सुबह सहरी के बाद पूरे दिन इबादत में समय बिताया. मगरिब की अज़ान 5:43 बजे के बाद इफ्तार किया. मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की गयी और तरावीह में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. रमजान: सिर्फ रोजा नहीं, बल्कि बुराइयों से बचने का महीना रमजान का महत्व केवल उपवास रखने तक सीमित नहीं है. बल्कि यह आत्मसंयम और नैतिक शुद्धि का महीना भी है. धार्मिक गुरुओं ने बताया कि इस दौरान झूठ, फरेब, बेईमानी, नाप-तोल में हेरा-फेरी, कमीशनखोरी और अन्य गलत कार्यों से बचना चाहिए. क्योंकि यह रोजे की पाकीजगी को नुकसान पहुंचाते हैं. रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है. बल्कि यह बुराइयों से बचने और इंसानियत की राह पर चलने का महीना है. दान-पुण्य व जकात-फितरा का महत्व रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग अपने कमाई का एक हिस्सा जकात व फितरा के रूप में निकालते हैं. जिससे गरीबों की मदद की जा सके. कोढ़ा प्रखंड के विभिन्न इलाकों में मस्जिदों और मदरसों में दान दिया जा रहा है. कई समाजसेवी संगठनों ने जरूरतमंदों के लिए राशन और कपड़ों का वितरण किया. बाजार में रमजान को लेकर हुई खरीददारी रमजान शुरू होते ही स्थानीय बाजारों में इफ्तार और सहरी की वस्तुओं की खरीदारी तेज हो गयी. खजूर, फल, शरबत, समोसे और पारंपरिक व्यंजनों की मांग बढ़ गयी. व्यापारियों का कहना है कि रमजान के पहले दिन से ही ग्राहकों की संख्या बढ़ गई है. खाद्य सामग्री की बिक्री में तेजी आयी है.
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