बरारी विधानसभा का चुनावी मुकाबला हमेशा से रोचक रहा है

बरारी विधानसभा का चुनावी मुकाबला हमेशा से रोचक रहा है

– आजादी से अब तक कांग्रेस 6 बार, राजद दो बार, भाजपा दो बार जीती – जनता दल एक बार, दलित मजदूर किसान पार्टीएक बार, जदयू एक बार विधायक जीते बरारी बिहार विधानसभा आम चुनाव 2025 अन्य चुनावों से काफी अलग हो चुका है. बिहार विधानसभा चुनाव में बरारी विधानसभा में 1957 से 69 तक कांग्रेस के वासुदेव प्रसाद सिंह चुनाव जीते थे. वह भी साइकिल की सवारी कर. मध्यावधि चुनाव 1969 में मो शकूर आलम सीपीएम से जीते. 1977 तक शकुर बरारी के विधायक रहे. 1977 से ढाई वर्ष फिर वासुदेव प्रसाद सिंह विधायक रहे. 1980 में करुणेश्वर सिंह ने कांग्रेस से बाजी मारी और बरारी विधायक बने. 1985 में भाई मिथिलेश कांग्रेस प्रत्यासी को दलित मजदूर किसान पार्टी के मंसूर आलम ने पराजित कर विधायक बने. 1990-95 निर्दलीय प्रेमनाथ जायसवाल विधायक रहे. 1995 में मंसूर आलम जनता दल से चुनाव जीते. 2000 से 2005 तक राजद से भी चुनाव जीता. 2005 मो शकुर एनसीपी ने भाजपा के विभाष चन्द्र चौधरी को हराकर विधायक बने. छह माह में विधानसभा भंग हुआ. पुनः चुनाव 2005 नवम्बर में होने पर भाजपा से विभाष चन्द्र चौधरी ने राजद के मंसूर आलम को हराकर विधायक बने. 2010 के चुनाव में भाजपा से विभाष चन्द्र चौधरी पुनः विधायक बने. 2015 के चुनाव में राजद से नीरज यादव ने 14 हजार 366 मतों से पराजित कर चुनाव जीते. 2020 जदयू के विजय सिंह ने राजद के विधायक नीरज यादव को 10 हजार 438 मतों के अन्तर से चुनाव जीते. ज्ञात हो कांग्रेस से वासुदेव प्रसाद सिंह 4 बार विधायक रहे. राज्य के शिक्षा राज्य मंत्री भी रहे. इनका निवास बारीनगर में है. मो शकूर कांग्रेस से एक बार, एनसीपी से एक बार विधायक रहे. कुरसेला महेशपुर के करुणेश्वर सिंह कांग्रेस से एक बार विधायक व मंत्री रहे. कठौतिया निवासी मंसूर आलम राजद से एक बार, जनता दल से एक बार, दलित मजदूर किसान पार्टी से एक बार विधायक व मंत्री भी रहे. भाजपा से विभाषचन्द्र चौधरी दो बार विधायक रहे. राजद से नीरज यादव एक बार विधायक रहे. जदयू से विजय सिंह वर्तमान में विधायक है.

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By RAJKISHOR K

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