कटिहार सदर अस्पताल आईसीयू सिस्टम मरीजों के लिए कारगर साबित नहीं हो पाया है. गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य चिकित्सा प्रदान करने व इमरजेंसी सेवा के साथ गहन चिकित्सा का लाभ देने के लिए सदर अस्पताल का आईसीयू 15 जनवरी 2011 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रहे अश्वनी कुमार चौबे ने इसका उद्घाटन किया था. इस गहन चिकित्सा की व्यवस्था पर सरकार ने लाखों रुपए खर्च किए थे लेकिन आलम यह रहा की आज तक स्पेशलिस्ट डॉ ट्रेंड टेक्नीशियन व मैनपॉवर के अभाव में आईसीयू का लाभ मरीज को नहीं मिल पाया. एक महीना पूर्व ही राज्य स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के आलोक में एक बार फिर से आईसीयू को दुरुस्त किया गया था. उन्हें रन करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया था. जिला स्वास्थ्य विभाग ने आईसीयू को पूरी तरह से अपडेट कर इसके संचालन को लेकर कुछ डॉक्टरों को ट्रेनिंग भी दिलायी गयी. लेकिन उस समय भी आईसीयू का सबसे अहम वेंटिलेटर की सुविधा मरीज को नहीं मिल पायी. वर्तमान समय में अभी आईसीयू में फिर ताला लग गया है. आईसीयू में कुल छह वेंटीलेटर उपलब्ध है. लाखों रुपए के उपकरण लगे हुए हैं. लेकिन इसका संचालन नहीं होने से कई उपकरण खराब भी पड़ गया है. आईसीयू में सबसे गंभीर अवस्था में मरीज को रखकर इलाज की जाती है. जिसे लाइफ सपोर्ट देकर वेंटिलेटर पर रखकर उनका इलाज किया जाता है. लेकिन सदर अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर तो उपलब्ध है. लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए ट्रेंड टेक्नीशियन मेंन पावर यहां तक की स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी मौजूद नहीं है. आईसीयू उद्घाटन के बाद कुछ दिनों तक मरीजों को आईसीयू सेवा मिली थी. जिसके बाद बंद पड़ गया. बीच-बीच में आईसीयू की उठी मांग को देखते हुए आनन फानन में किसी तरह से इसे संचालित किया गया. लेकिन कभी एक महीना तो कभी दो महीने के बाद फिर बंद पड़ गया. कोरोना काल के समय में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर टेक्नीशियन की मदद से आईसीयू की सेवा मरीजों को मिली. लेकिन उसके बाद फिर बंद पर गया. वर्तमान समय में गंभीर अवसथा में मरीजों को सीधे हायर सेंटर रेफर किया जाता है. चूंकि अस्पताल में गंभीर मरीजों को आईसीयू सेवा दे सकें. इसको लेकर इंतजाम ही नहीं है. डॉक्टर व टेक्नीशियन के अभाव में वर्षों से बंद पड़ा हुआ है, आईसीयू सदर अस्पताल में आईसीयू वर्षों से बंद पड़ा हुआ है या यूं कहे सदर अस्पताल में आईसीयू की जब से स्थापना हुई है. तब से यह बंद ही रहा है. हालांकि बीच-बीच में मरीजों की सेवा के लिए आईसीयू को संचालित किया गया था. लेकिन यह प्रॉपर ढंग से मरीजों को लाभ पहुंचाने में नाकाम रहा. इसका मुख्य कारण सदर अस्पताल में चिकित्सकों की कमी और टेक्नीशियन की कमी के कारण रहा है. आईसीयू में 24 घंटा डॉक्टर की मौजूदगी अनिवार्य है. पूरे सिस्टम को संचालित करने के लिए इसमें टेक्नीशियन का अहम रोल होता है लेकिन विडंबना है कि सदर अस्पताल में आईसीयू की स्थापना तो हो गई लेकिन जब से आईसीयू की सेवा के लिए इन्हें बहाल किया गया. तभी से सदर अस्पताल में डॉक्टर टेक्नीशियन की कमी के कारण आईसीयू की सेवा को बंद करना पड़ा. मरीज को आईसीयू की सेवा मिल सकें. इसको लेकर सदर अस्पताल के कुछ डॉक्टर को ट्रेनिग भी दिया गया था. यहां तक की आईसीयू के मशीन के संचालन को लेकर जीएनएम एएनएम के कुछ कर्मियों को भी विशेष ट्रेनिंग भी दी गई थी. लेकिन इसका लाभ नहीं मिल पाया. कोरोना काल के समय में मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉ और टेक्नीशियन के सहयोग से सदर अस्पताल में आईसीयू की सेवा को बहाल की गई थी. लेकिन यह भी ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया. फिलहाल एक महीना पूर्व राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से आईसीयू सेवा बहाल को लेकर आदेश जारी होने पर जिला स्वास्थ्य विभाग आईसीयू सेवा को बहाल तो की लेकिन मरीज को वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं कर सके एक बार फिर आईसीयू में ताला लटक गया है. कहते है सिविल सर्जन सिविल सर्जन डॉ जितेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि आईसीयू सेवा दुरुस्त है. लेकिन मरीज को वेंटिलेटर पर रखकर उनका इलाज हो सके इसकी व्यवस्था नहीं है. इसमें ट्रेंड टेक्नीशियन मेंन पावर की जरूरत है. 24 घंटे डॉक्टर की भी मौजूदगी अनिवार्य है. यह सभी कमी के कारण आईसीयू में मरीजों को जो लाभ मिलना चाहिए. वह नहीं मिल पा रहा. इसको लेकर विभाग को आईसीयू रन करने को लेकर सभी की मांग करते आ रहे है.
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