कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट:
कटिहार: पूर्णिया विश्वविद्यालय अंतर्गत अंगीभूत महाविद्यालयों में बने महिला छात्रावासों के दुरुपयोग का मामला RTI के जरिए सामने आने के बाद कॉलेजों में हड़कंप मच गया है. स्थिति यह है कि कई छात्रावास निर्माण के 18 वर्ष बाद भी एक भी छात्रा का नामांकन नहीं हो सका है, जबकि इन भवनों में अस्थायी तौर पर इग्नू, मानू और NCC के कार्यालय संचालित किए जा रहे हैं.
पूर्णिया विवि बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक डॉ. आलोक राज ने छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए RTI के तहत महिला छात्रावास की स्थिति को लेकर जानकारी मांगी थी. उन्होंने 16 फरवरी 2026 को आवेदन दिया था, लेकिन 16 मार्च तक जवाब नहीं मिलने पर 15 अप्रैल 2026 को प्रथम अपीलीय पदाधिकारी के समक्ष पुनः आवेदन किया.
RTI में उन्होंने दो प्रमुख सवाल उठाए थे—पहला यह कि किन-किन जगहों पर महिला छात्रावास बने हैं, उनमें से कितने उपयोग में हैं और कितने खाली पड़े हैं. दूसरा सवाल विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव, कुलानुशासक, छात्र कल्याण पदाधिकारी और सभी प्राचार्यों के नाम एवं स्थायी पते उपलब्ध कराने को लेकर था.
प्रथम अपील के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी अंगीभूत महाविद्यालयों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद कॉलेज स्तर पर हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है.
डीएस कॉलेज के RTI पदाधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार ने बताया कि कॉलेज में यूजीसी के दसवीं योजना के तहत वर्ष 2008 में करीब 78 लाख रुपये की लागत से दो मंजिला महिला छात्रावास का निर्माण कराया गया था. लेकिन 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस भवन में आज तक एक भी छात्रा का नामांकन नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले RTI का जवाब समय पर नहीं भेजा जा सका था, लेकिन अब रिपोर्ट तैयार कर जल्द विश्वविद्यालय को भेज दी जाएगी. वर्तमान में इस भवन का उपयोग अस्थायी रूप से इग्नू, मानू और NCC के कार्यालयों के लिए किया जा रहा है.
डॉ. आलोक राज ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि करोड़ों की लागत से बने महिला छात्रावास का उपयोग छात्राओं के लिए नहीं होना चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए गए इन भवनों का इस तरह दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता.
