प्रतिनिधि, कटिहार सदर अस्पताल की नई बिल्डिंग भले ही करोड़ों रुपए की बन गयी हो. कई संसाधनों से लैस भी हो गया हो. पर अब भी मरीजों की परेशानी कम नहीं हुई है. दरअसल सदर अस्पताल में कोई एक्सीडेंटल मरीज गंभीर रूप से अपना इलाज कराने के लिए जब पहुंचता है तो उन्हें बाहर से सिलाई के धागा की खरीदारी के लिए मजबूर होना पड़ता है. इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि सदर अस्पताल में गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों को कितना परेशान होना पड़ता है. ताजा मामला रविवार की है. घर में खेल रहे एक बच्चा गिरने से उसका सर बुरी तरह से फट गया. परिवार वालों ने उन्हें फौरन सदर अस्पताल में भर्ती किया. जहां डॉक्टर के देखने के बाद बच्चों के सर पर सिलाई करने को कहा गया. लेकिन सिलाई के लिए जो धागा अस्पताल में मौजूद होना चाहिए वह नहीं मिल पाया. जिस कारण से परिजनों को बाहर धागे की खरीदारी करने के लिए विवश होना पड़ा. 3,0 मार्कशीट नामक धागा की खरीदारी बाहर 230 रुपया अदा करके बच्चे की स्टिच के लिए धागा की खरीदारी करनी पड़ी. सदर अस्पताल के ओटी असिस्टेंट ने बताया कि सदर अस्पताल में जो सिलाई के लिए धागा मौजूद है. वह मोटा है. कई बार सिलाई के लिए पतले धागा यानी की 3,0 मार्कशील की आवश्यकता होती है. जो सदर अस्पताल में मौजूद नहीं है. बाहर से ही खरीदारी करनी पड़ती है. ऐसे में दिन के समय में बाहर मेडिकल में पैसे देकर तो धागा मिल जाता है. लेकिन खास करके रात के समय में यदि कोई घटना हो जाय तो ऐसे में परिजनों को धागा खरीदारी करने को लेकर सबसे ज्यादा परेशान होना पड़ता है. गौरतलाब हो की पहले अस्पताल परिसर में 24 घंटे एक मेडिकल खुली रहती थी. जिसे बंद करा दिया गया है. जिस कारण से अब मरीज को खास कर रात्रि के समय खरीदारी को लेकर सबसे ज्यादा परेशान होना पड़ता है.
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