कटिहार मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना के तहत थैलेसीमिया मरीजों के एचएलए मैचिंग को लेकर एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में चार जुलाई को शिविर का आयोजन किया जायेगा. शिविर में 12 साल तक के बच्चे जो थैलेसीमिया से पीड़ित है. उनके स्थाई तौर पर इस बीमारी से बचाव को लेकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट को लेकर बच्चे और उनके परिवार के सदस्य का एचएलए मैचिंग किया जायेगा. यदि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे का उनके परिवार के सदस्य किसी से एचएलए मेचिंग हो जाता है तो ऐसे में पीड़ित बच्चे में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. बोन मैरो ट्रांसप्लांट वेल्लोर में किया जायेगा. बिहार सरकार इस योजना के तहत एक थैलेसीमिया पीड़ित पर 15 लाख रुपए खर्च कर रही है. इस योजना के तहत थैलेसीमिया बच्चे को बोन मैरो ट्रांसप्लांट होने के बाद उन्हें फिर ब्लड चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. साधारण भाषा में कहें तो थैलेसीमिया पीड़ित बच्चा पूरी तरह से इस प्रक्रिया के बाद ठीक हो जायेंगा. इस योजना के तहत मैचिंग को लेकर जिला में पीड़ित बच्चों के परिवार वाले से ब्लड सेंटर के विभाग अधिकारी पिछले कई दिनों से संपर्क कर रहे हैं. हालांकि इस मेचिंग को लेकर कुछ बच्चों के परिवार वाले ही मुजफ्फरपुर जाने के लिए अभी तैयार हुए हैं. बता दें कि एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर जाने के बाद यदि पीड़ित बच्चे का उनके परिवार के सदस्यों से मेचिंग हो जाता है तो उनके उपरांत वेल्लोर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट का कार्य किया जायेगा. कटिहार के बच्चे जो पीड़ित है उनके एक अटेंडेंट के साथ घर से वेल्लोर जाने आने का पूरा खर्च और इस बोन मैरो ट्रांसप्लांट में खर्च की पूरी राशि बिहार सरकार के जिम्मे होगा. थेलेसिमिया एक गंभीर रोग है. जिससे शरीर में स्वस्थ प्रभावी लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण नहीं हो पाता है. जिस कारण से इस रोग से पीड़ित को हमेशा बल्ड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है. थैलेसीमिया के मरीजों के लिए एकमात्र स्थाई इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट है. जो न केवल महंगा है बल्कि काफी जटिल भी है.
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