बलिया बेलौन इस्लामी साल का पहला महीना मुहर्रम शहादत का महीना है. इस्लामी केलेंडर के मुताबिक 10 मुहर्रमुल हराम 61 हिजरी को हजरत सैयदना इमाम हुसैन रदीअल्लाह अन्हो इमान की हिफाजत करते हुए कर्बलाए मोअल्ला इराक में जाम ए शहादत पाकर अहले खानदान व 72 साथियों के साथ शहीद हो गये. इस जंग में इमान की हिफाजत करते हुए शहीद होना मंजूर किया. लेकिन यजीद काफीरों के साथ सूलह नहीं किया. उक्त बातें बताते हुए मरकजी रौयते हेलाल इस्लाही कमेटी सालमारी के मौलाना मेराज आलम ने कहा की कत्ल ए हुसैन असल में मरगे यजीद है. इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद. उन्होंने बताया की प्यारे नबी हजरत मोहम्मद सल्ललाह अलेहोसल्लम के प्यारे नवासे हजरत इमाम हुसैन व इमाम हसन ने यजीदीयों के हुक्म को नहीं मान कर अल्लाह ताला के बताये रास्ते पर चलना मंजूर किया. यजीदीयों ने इमाम हुसैन के काफिला के लिए पानी बंद कर दिया. जंग करने पर मजबूर किया. इतनी तकलीफ ज्यादती सहने के बाद भी काफीरों का हुक्म नहीं माना. मुल्क इराक के कर्बला में शहीद हो गये. मौलाना मेराज आलम ने कहा की रविवार को मोहर्रमुल हराम के 10 वीं को कर्बला शांति से मनाने की अपील करते हुए कहा की किसी को हुड़दंग करने की शरीयत इजाजत नहीं देती है. इस दिन इबादत करना, रोजा रखना, नमाज अदा करना सब से अफजल है. शरीयत ए मोहम्मदी खरोफात करने की इजाजत नहीं देती है. उन्होंने कहा की इस वर्ष रविवार को क्षेत्र के भेलागंज, रेयांपुर, शिकारपुर, बलिया बेलौन, सालमारी, इमादपुर आदि कर्बला मैदान में हजारों की संख्या में अकीदत मंद पहुंच कर मुहर्रम का रशम पूरा करते है. लोगों को एक दूसरे की भावनाओं का ख्याल रखते हुए यह रशम अदा करना चाहिए.
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