फलका (कटिहार). गोविंदपुर पंचायत के वार्ड संख्या 13 स्थित महेशपुर गांव में धान के खेत से एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली. सुबह खेत की ओर गए ग्रामीणों ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी. मौके पर पहुंचने पर नवजात बच्ची धान के खेत में पड़ी मिली. ग्रामीणों ने उसे सुरक्षित गांव लाकर इसकी सूचना आसपास के लोगों को दी.
रोती बच्ची को देखकर अंजनी देवी की ममता उमड़ी
नवजात को लावारिस हालत में देखकर गांव की अंजनी देवी भावुक हो गईं. उन्होंने बच्ची को अपने संरक्षण में लेकर उसकी परवरिश करने की इच्छा जताई. इसके बाद उन्होंने बिना देर किए नवजात को फलका अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने बच्ची की जांच कर आवश्यक उपचार किया.
चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल संरक्षण टीम पहुंची गांव
नवजात के मिलने की सूचना स्थानीय स्तर पर चाइल्ड हेल्पलाइन कटिहार को दी गई. जानकारी मिलने के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम महेशपुर गांव पहुंची. टीम ने ग्रामीणों और बच्ची को संरक्षण देने वाली अंजनी देवी से घटना के संबंध में आवश्यक जानकारी ली.
नियमानुसार संरक्षण में लेने की शुरू हुई प्रक्रिया
टीम ने नवजात बच्ची को बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन के संरक्षण में लेने की प्रक्रिया शुरू की. इस दौरान अंजनी देवी और उनके पति मनोज साह सहित कई ग्रामीण बच्ची को अपने पास रखना चाहते थे. बच्ची के प्रति अंजनी देवी का लगाव देखकर मौके पर भावुक माहौल बन गया.
समझाने के बाद टीम को सौंपी बच्ची
चाइल्ड हेल्पलाइन के समन्वयक हरदेव शर्मा, सुशांत कुमार और पिंकू कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण सिन्हा, जिला बाल संरक्षण इकाई के कर्मियों तथा फलका थाना की पुलिस अवर निरीक्षक पिंकी कुमारी ने ग्रामीणों और अंजनी देवी को समझाया. काफी समझाने-बुझाने के बाद अंजनी देवी ने नवजात बच्ची को बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम को सौंप दिया.
बच्ची को सौंपते समय भावुक हुईं अंजनी देवी
बच्ची को बाल संरक्षण टीम के हवाले करने के बाद अंजनी देवी भावुक हो गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं. घटना के बाद ग्रामीणों के बीच नवजात बच्ची को खेत में छोड़ने वाली मां को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं.
बाल संरक्षण इकाई की देखरेख में है नवजात
फिलहाल नवजात बच्ची को नियमानुसार बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण में रखा गया है. बच्ची के संबंध में आवश्यक कानूनी और संरक्षण संबंधी प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
