एनएच-31 बना मौत का हाइवे : कोढ़ा में एक महीने में 14 से अधिक की मौत

कोढ़ा थाना क्षेत्र के एनएच 31 इनदिनों मौत का हाइवे बनता जा रहा है.

कोढ़ा. कोढ़ा थाना क्षेत्र के एनएच 31 इनदिनों मौत का हाइवे बनता जा रहा है. अप्रैल व मई महीने में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं ने न केवल लोगों की जान ली है, बल्कि प्रशासन व सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. तेज रफ्तार, लापरवाही व संकीर्ण सड़क के कारण आये दिन यहां खून-खराबा हो रहा है, लेकिन स्थिति में अब तक कोई सुधार नहीं दिख रहा है. सबसे भयावह हादसा 11 अप्रैल 2026 की शाम को बसगाड़ा चौक के पास हुआ. जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. एक तेज रफ्तार बस ने पहले बाइक सवारों को टक्कर मारी और उसके बाद सामने से आ रही पिकअप वैन से जोरदार भिड़ंत हो गयी. भीषण दुर्घटना में 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गये. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस की गति अत्यधिक तेज थी. चालक ने नियंत्रण खो दिया. जिससे यह बड़ा हादसा हुआ. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में चीख-पुकार मच गयी थी. सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था. इस दर्दनाक घटना के बाद भी हादसों का सिलसिला थमा नहीं. 28 अप्रैल की रात करीब 9 बजे दादपुर चौक के समीप एक ट्रक व ऑटो के बीच जोरदार टक्कर हो गयी. इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गयी, जबकि अन्य लोग घायल हो गये. स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां अक्सर रात के समय तेज रफ्तार ट्रकों का दबदबा रहता है. जिससे छोटे वाहनों के लिए चलना खतरनाक हो जाता है. इसके बाद 4 मई की रात करीब 10 बजे फुलडोवी मोड़ के पास एक और बड़ा हादसा हुआ. इस बार ट्रक, बाइक और कार के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गयी. इसमें 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गये. घायलों की स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें तत्काल पूर्णिया रेफर किया गया. डॉक्टरों के अनुसार सभी की हालत नाजुक बनी हुई थी. इसी कड़ी में 11 मई की शाम करीब 6 बजे एक और हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन ली. पिकअप और बाइक की आमने-सामने की टक्कर में एक मजदूर की मौत हो गई. मृतक स्थानीय निवासी था और रोजी-रोटी के लिए काम कर घर लौट रहा था. तभी यह हादसा हो गया. घटना के बाद चालक वाहन लेकर फरार हो गया. इससे लोगों में आक्रोश फैल गया. लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एनएच-31 पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. खासकर चेथरियापीर से लेकर डुमर पुल तक का इलाका हादसों का हॉटस्पॉट बन चुका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही अधिक है, लेकिन सड़क संकरी और जर्जर है. जिससे दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है. ग्रामीणों व राहगीरों का आरोप है कि अधिकांश हादसे तेज रफ्तार व लापरवाही के कारण हो रहे हैं. बड़े वाहन चालक अक्सर नियमों की अनदेखी करते हैं. ओवरटेक के दौरान सामने से आ रहे वाहनों को कुचल देते हैं. रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है. जब हाई बीम लाइट और तेज गति के कारण सामने कुछ दिखाई नहीं देता. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से कई बार इस सड़क को फोरलेन बनाने की मांग की है.

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By RAJKISHOR K

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