मक्के की बंपर पैदावार से किसान खुश, लेकिन कम दाम से नाराजगी

Maize Production: कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड में इस बार मक्के की बंपर पैदावार होने से जहां किसानों के चेहरे खिले हैं, वहीं बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम दाम मिलने के कारण स्थानीय अन्नदाताओं में गहरा असंतोष व्याप्त है.

कटिहार (अमदाबाद) से मनोज कुमार की रिपोर्ट

Maize Production: बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र अंतर्गत कटिहार जिले का अमदाबाद प्रखंड इन दिनों रबी फसल के रूप में मक्के की शानदार आवक से गुलजार है. क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित दियारा इलाकों में इस बार मक्के की रिकॉर्ड तोड़ उपज संधारित हुई है, जिससे किसान बेहद उत्साहित हैं. हालांकि, इस बंपर पैदावार की खुशी पर स्थानीय बाजार में मिल रहे कम दामों ने पानी फेर दिया है. विधिक मानक दर (MSP) से काफी नीचे जाकर स्थानीय खरीदारों द्वारा मक्के की खरीदारी किए जाने से प्रक्षेत्र के गरीब कली-मजदूरों और किसानों को अपनी लागत और कड़ी मेहनत का उचित फल नहीं मिल पा रहा है, जिससे कृषि कड़ियों में निराशा का माहौल है.

बाढ़ प्रभावित दियारा की मुख्य नकदी फसल; देर से पानी सूखने पर मक्के को प्राथमिकता

अमदाबाद प्रक्षेत्र की भौगोलिक विसंगतियों और कृषि प्रणालियों की मुख्य कड़ियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं. यह पूरा प्रखंड एक गंभीर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है, जहां साल में मुख्य रूप से दो ही फसलें संधारित हो पाती हैं. रबी सीजन में खेतों से देर से पानी सूखने के कारण यहां के किसान गेहूं और मसूर के मुकाबले मक्के की खेती को अधिक प्राथमिकता देते हैं.

इस बार दुर्गापुर, भवानीपुर खट्टी, किशनपुर, पार दियारा और दक्षिणी करीमुल्लापुर सहित विभिन्न पंचायतों में व्यापक पैमाने पर मक्के की बुआई की गई थी. समय से पहले बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए किसान यहां भदई फसल के रूप में पटसन (जूट) भी उगाते हैं, लेकिन आजीविका का मुख्य आधार मक्का ही रहता है.

एमएसपी 24 रुपये, लेकिन बिचौलिए दे रहे महज 18 रुपये; किसानों ने बयां किया दर्द

“दुर्गापुर पंचायत के प्रगतिशील किसान विजय सिंह, साधु मंडल और प्रमोद चौधरी ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि खेतों में मक्के की बालियां बहुत अच्छी आई हैं और प्रति एकड़ उपज भी शानदार है. लेकिन जब वे फसल लेकर स्थानीय मंडी पहुंच रहे हैं, तो उनकी आर्थिक कमान टूट रही है. सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) करीब 24 रुपये प्रति किलो है, जबकि स्थानीय आढ़ती और खरीदार कली-मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाकर महज 18.00 से 18.50 रुपये की दर से अनाज खरीद रहे हैं.”

Maize Production: सरकारी क्रय केंद्र मुस्तैद करने की मांग; लागत निकालना हुआ मुश्किल

इस राजनैतिक और प्रशासनिक विसंगति के कारण किसानों को प्रति क्विंटल 500 से 600 रुपये का सीधा घाटा उठाना पड़ रहा है. खाद, बीज, सिंचाई और कली-मजदूरों की मजदूरी जोड़ने के बाद इस दर पर फसल बेचना घाटे का सौदा साबित हो रहा है.

प्रक्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और किसान संगठनों ने जिला कप्तानों और सहकारिता विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि अमदाबाद प्रखंड के प्रभावित मुख्य प्रक्षेत्रों में तुरंत सरकारी क्रय केंद्र (पैक्स) मुस्तैद किए जाएं. साथ ही विधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लाइव मक्का खरीद संधारित की जाए ताकि सुदूर दियारा के गरीब किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके और उनका भविष्य सुरक्षित हो सके.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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