कदवा लोजपा नेता राजीव रंजन ने दर्जनों कार्यकर्ताओ के साथ पार्टी से दिया इस्तीफा दे दिया तथा निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. बिहार विधानसभा चुनाव का ऐलान के साथ ही कदवा विधानसभा का सीट बंटवारे के नाम पर पेंच फंसा हुआ था. सीट सेयरिंग होने के बाद कदवा विधान सभा सीट में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई हैं. लगातार एनडीए कार्यकर्ताओं में फुट नजर आने लगा हैं. अपने आपको लोजपा सिपाही बताने वाले राजीव रंजन ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है. राजीव रंजन को कदवा विधानसभा से पार्टी द्वारा आश्वासन के बाद भी लोजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद दिल टूट गया है. निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी. उन्होंने कहा कि काफी लंबे समय से मैं जमीनी स्तर से लगातार मेहनत कर जनता के बीच जा रहा था. लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए लोजपा पार्टी को कदवा विधानसभा क्षेत्र में मजबूती प्रदान करने को लेकर हर संभव प्रयास कर रहे थे. लेकिन पार्टी के आलाकमान ने राजीव रंजन पर भरोसा नहीं जताया और कदवा विधानसभा सीट जदयू के खाते में चला गया. जिसके बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसला लिया हैं. कदवा मेरा कर्म भूमि हैं. मेरा संकल्प कदवा का चौमुखी विकास करना हैं. विकास करना ही मेरा धर्म हैं. कदवा विधानसभा का सीट लोजपा के खाते में गया था. रातों रात सीट को बदल कर जदयू कर दिया गया. मैं लोजपा पार्टी से अपने समर्थकों के साथ इस्तीफा देकर कदवा की जनताओं का टिकट पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया हूं. लोजपा पार्टी से इस्तीफा देने वालों में प्रदेश महासचिव राजीव रंजन किसान प्रकोष्ठ, जिला अध्यक्ष रवि शंकर वर्मा, पंचायती राज प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह, जिला उपाध्यक्ष टिंकू वर्मा, जिला प्रधान महासचिव किसान प्रकोष्ठ धनजीत कुमार, किसान प्रकोष्ठ प्रखंड अध्यक्ष प्रकाश पंडित, पंचायत अध्यक्ष संतोष राय, भीम साह, नरेश गोस्वामी, बमबम झा, रंजीत वर्मा, संजय विश्वास, गौतम यादव शामिल हैं.
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