कटिहार से राज किशोर चौरसिया की रिपोर्ट
Katihar Weather: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में चिलचिलाती धूप और उमस झेल रहे लोगों के लिए राहत और आफत दोनों एक साथ आने वाली है. मौसम विज्ञान केंद्र ने कटिहार जिले के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ (Orange Alert) जारी करते हुए शुक्रवार को गरज-चमक के साथ तेज बारिश और आंधी-तूफान का पूर्वानुमान जताया है. इस दौरान जिले का अधिकतम तापमान 33°C और न्यूनतम तापमान 27°C के आस-पास रहने का अनुमान है. हालांकि बादलों और बौछारों से तापमान में गिरावट आएगी, जिससे लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से तो निजात मिलेगी, लेकिन 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बहने वाली चक्रवाती हवाएं जनजीवन और खेती-किसानी के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती हैं.
अभी प्री-मानसून का दौर; पूर्णिया के रास्ते 15 जून के बाद दाखिल होगा मुख्य मानसून
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) कटिहार के मुख्य मौसम वैज्ञानिक डॉ. पंकज कुमार ने इस मौसमी बदलाव की तकनीकी कड़ियों को स्पष्ट किया है:
- प्री-मानसून की सक्रियता: वैज्ञानिक के अनुसार, बिहार के मुख्य भूभाग में अभी दक्षिण-पश्चिम मानसून ने विधिवत प्रवेश नहीं किया है. इसलिए वर्तमान में हो रही इस मानसूनी हलचल और बारिश को ‘प्री-मानसून शावर’ कहा जाएगा.
- 15 जून की डेडलाइन: सीमांचल के रास्ते बिहार में मानसून के प्रवेश की कड़ियों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि मानसूनी हवाओं के पूर्णिया से टकराकर 15 जून के बाद आगे बढ़ने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं. तब तक कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया के इलाकों में रुक-रुककर तेज आंधी और बारिश का सिलसिला जारी रहेगा.
दोपहर 12 बजे के बाद 20% बारिश की संभावना; उमस के बाद मिलेगी राहत
मौसम के पल-पल बदलते मिजाज के अनुसार शुक्रवार के दिन का शेड्यूल कुछ इस प्रकार रहने वाला है:
- सुबह का समय (7:00 से 11:00 बजे): सुबह के वक्त आसमान आंशिक रूप से साफ रहेगा और हल्की धूप खिलेगी, जिससे तापमान 28°C से 32°C के बीच रहेगा.
- दोपहर का समय (12:00 बजे के बाद): दोपहर ढलते ही घने कपासी बादलों का निर्माण होगा और करीब 20% तक तत्कालिक वर्षा की संभावना है. मेघ गर्जन और आकाशीय बिजली के साथ हल्की से मध्यम बौछारें गिरेंगी.
- आर्द्रता का स्तर: हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) का ग्राफ 67% तक उच्च स्तर पर रहने के कारण बारिश शुरू होने से ठीक पहले लोग अत्यधिक चिपचिपी उमस से परेशान हो सकते हैं, लेकिन बौछारें पड़ते ही मौसम सुहावना हो जाएगा.
केले, आम और लीची की फसलों को बड़ा खतरा; प्रशासन ने जारी की गाइडलाइन
ऑरेंज अलर्ट का मतलब ‘तैयार रहें’: 50 किमी/घंटे की रफ़्तार से चलने वाले हवा के झोंके जर्जर बिजली के तारों को तोड़ सकते हैं और कमजोर पेड़ों को उखाड़ सकते हैं.
इस तेज अंधड़ के कारण कोढ़ा, फलका और समेली प्रखंडों में बड़े पैमाने पर की जाने वाली केले की खेती, बागवानों के आम और लीची की फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है. आंधी के कारण फल टूटकर गिर सकते हैं और केले के पौधे बीच से फट सकते हैं.
आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन ने जान-माल की सुरक्षा को लेकर आम नागरिकों से अपील की है कि वे खराब मौसम, आंधी या वज्रपात के दौरान किसी भी सूरत में बड़े और पुराने पेड़ों के नीचे, बिजली के ट्रांसफार्मर के पास, खुले मैदानों या एस्बेस्टस व टिनशेड वाले कच्चे मकानों में शरण न लें.
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह: खेत की नालियां दुरुस्त करें किसान भाई
कृषि वैज्ञानिक डॉ. पंकज कुमार ने अन्नदाताओं को विशेष परामर्श देते हुए कहा कि आगामी 48 घंटों तक मौसम का मिजाज बेहद अनिश्चित बना रहेगा. ऐसे में किसान भाई धान की नर्सरी (बिचड़ा) डालने या भदई फसलों की बुवाई करने से पहले मौसम के साफ होने का इंतजार करें. जिन खेतों में पहले से फसलें लगी हैं, वहां जलजमाव को रोकने के लिए जल निकासी (ड्रेनेज) की नालियों को साफ कर लें, ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी खेतों में जमा होकर पौधों की जड़ों को न सड़ा सके.
