कहीं आप भी तो नहीं खा रहे जहरीली 'थाई मांगुर'? कटिहार में 50 क्विंटल की खेप पकड़ी गई, जानें पहचान का तरीका

मत्स्य विभाग ने कटिहार में 50 क्विंटल प्रतिबंधित चाइनीज थाई मांगुर मछली जब्त की है। यह मछली स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक है। जानें इसे पहचानने के तरीके और प्रतिबंध के कारण।

कटिहार. जिले में प्रतिबंधित चाइनीज थाई मांगुर मछली के खिलाफ मत्स्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. गुप्त सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने रौतारा टोल प्लाजा के पास मछली लदे एक वाहन को रोककर करीब 50 क्विंटल प्रतिबंधित चाइनीज थाई मांगुर मछली जब्त की. वाहन में सवार तीन लोगों को हिरासत में लिया गया. पूछताछ के बाद उनकी पहचान अभिजीत, कलीम और अब्दुल्ला के रूप में हुई. जब्त मछली को नियमों के तहत नष्ट कर दिया गया.

गुप्त सूचना पर रौतारा टोल प्लाजा के पास हुई कार्रवाई

जिला मत्स्य पदाधिकारी सनत कुमार सिंह ने बताया कि विभाग को सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित चाइनीज थाई मांगुर मछली को दो वाहनों के माध्यम से ले जाया जा रहा है. सूचना के आधार पर विभागीय टीम ने रौतारा टोल प्लाजा के समीप वाहनों की जांच शुरू की. जांच के दौरान मछली से लदे वाहन को रोककर तलाशी ली गयी, जिसमें बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मछली बरामद हुई. वाहन में मौजूद तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी.

पालन, बिक्री और परिवहन पर प्रतिबंध

जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि चाइनीज थाई मांगुर मछली के पालन, बिक्री, परिवहन और सेवन पर प्रतिबंध है. इसके बावजूद जिले में बड़े पैमाने पर इसके कारोबार की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गयी. विभाग की टीम ने जब्त मछली को नियमानुसार नष्ट कर दिया. अब जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि मछली की खेप कहां से लाई गयी थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था.

थाई मांगुर की पहचान कैसे करें

थाई मांगुर को सामान्य देशी मांगुर से केवल देखकर पहचानना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता. बाजार में मछली खरीदते समय उपभोक्ताओं को कुछ बाहरी संकेतों पर ध्यान देना चाहिए. थाई मांगुर आमतौर पर गहरे भूरे या काले रंग की, चिकनी त्वचा वाली और अपेक्षाकृत बड़े आकार की दिख सकती है. इसका सिर चौड़ा और मुंह बड़ा होता है. शरीर लंबा और मजबूत होता है तथा मछली पर सामान्य मछलियों की तरह शल्क दिखाई नहीं देते. हालांकि केवल रंग, आकार या सिर की बनावट के आधार पर किसी मछली को निश्चित रूप से थाई मांगुर नहीं माना जा सकता. सही पहचान के लिए मत्स्य विभाग या विशेषज्ञ की जांच जरूरी है. इसलिए संदेह होने पर ऐसी मछली खरीदने या बेचने के बजाय संबंधित मत्स्य अधिकारी को सूचना देना बेहतर है.

प्रतिबंधित क्यों है चाइनीज थाई मांगुर

चाइनीज थाई मांगुर को लेकर पर्यावरणीय और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सामने आती रही हैं. इसके पालन पर रोक का एक प्रमुख कारण स्थानीय जलस्रोतों और देशी मछलियों पर इसके संभावित प्रतिकूल प्रभाव हैं. यह तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति है और स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी पर दबाव डाल सकती है. इसके अलावा बिना नियंत्रित परिस्थितियों में उत्पादित या अस्वच्छ तरीके से रखी गयी मछली के सेवन में खाद्य सुरक्षा का जोखिम भी हो सकता है. इसी कारण प्रतिबंधित प्रजाति के पालन, कारोबार और परिवहन पर कार्रवाई की जाती है.

स्वास्थ्य पर क्या पड़ सकता है असर

प्रतिबंधित चाइनीज थाई मांगुर के सेवन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंता मुख्य रूप से इसके पालन और आपूर्ति की परिस्थितियों से जुड़ी होती है. यदि मछली दूषित पानी में पाली गयी हो या अस्वच्छ तरीके से संग्रहित और परिवहन की गयी हो तो उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव या अन्य दूषित पदार्थ मौजूद हो सकते हैं. इससे फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि केवल किसी मछली को थाई मांगुर कहे जाने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसके सेवन से हर व्यक्ति को निश्चित रूप से कोई बीमारी होगी. स्वास्थ्य जोखिम मछली के पालन, पानी की गुणवत्ता, स्वच्छता, भंडारण और पकाने की प्रक्रिया पर भी निर्भर करता है.

जप्त प्रतिबंध मछली | Prabhat Khabar Network

पुलिस चेकपोस्ट पर सख्ती बढ़ाने की अपील

जिला मत्स्य पदाधिकारी ने जिले के विभिन्न पुलिस चेकपोस्ट पर भी सख्ती बढ़ाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि चेकपोस्ट पर वाहनों की नियमित जांच होने से प्रतिबंधित मछली के परिवहन पर प्रभावी रोक लगायी जा सकती है. खासकर दूसरे जिलों और राज्यों से आने-जाने वाले मछली लदे वाहनों की जांच पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बतायी गयी है.

कारोबारियों के दावे की पुलिस जांच बाकी

विभाग के अनुसार पूछताछ के दौरान हिरासत में लिए गए कारोबारियों ने कथित रूप से दावा किया कि वे रोज थाना को मैनेज करके यह कारोबार चला रहे थे. हालांकि इस दावे की पुलिस स्तर पर पुष्टि अभी नहीं हुई है. इसलिए इसे फिलहाल आरोप या पूछताछ के दौरान सामने आए दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है. विभाग और पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंधित मछली का कारोबार कहां से संचालित किया जा रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By राणा प्रताप सिंह

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >