कटिहार जिले में मौसम का मिजाज लगातार गर्म और बेहद उमसभरा बना हुआ है. पिछले 10 से 12 दिनों से बारिश न होने के कारण जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, वहीं किसानों की चिंताएं गहरा गई हैं. गुरुवार को दिनभर आंशिक रूप से बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया गया है. हालांकि, बारिश की संभावना महज 20 से 50 प्रतिशत होने के कारण राहत मिलने के आसार बेहद कम हैं.
तापमान 34 डिग्री, लेकिन 41 डिग्री जैसा अहसास
मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को जिले का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. हवा में नमी का स्तर 77 प्रतिशत और हवा की गति 14 किलोमीटर प्रति घंटा रहने से उमस का स्तर काफी अधिक है, जिससे वास्तविक तापमान 34 डिग्री होने के बावजूद 41 डिग्री सेल्सियस जैसी प्रचंड गर्मी महसूस हो रही है. दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा छा रहा है और लोग डिहाइड्रेशन से बचने के लिए तरल पदार्थों का सहारा ले रहे हैं.
सूख रही हैं धान और मखाना की फसलें, खेतों में आईं दरारें
बारिश न होने का सबसे गंभीर असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है. जिले में रोपनी के बाद धान की पौध मुरझाने लगी है और खेतों में दरारें आ रही हैं. मखाना के तालाबों में भी जलस्तर तेजी से गिर रहा है. किसान मजबूरी में महंगे डीजल पंप और बोरिंग के जरिए सिंचाई कर फसलों को बचाने में जुटे हैं, जिससे उनकी खेती की लागत दोगुनी हो गई है. किसानों का कहना है कि यदि अगले 3-4 दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचेगा.
शाम को हल्की बौछार के आसार, आगे कैसा रहेगा मौसम
प्रति घंटे के पूर्वानुमान के अनुसार:
- दोपहर 1 से 3 बजे: तापमान 34 डिग्री रहेगा और 30 प्रतिशत बारिश के आसार हैं.
- शाम 4 से 6 बजे: मौसम में थोड़ा बदलाव आ सकता है, जहां 40 से 50 प्रतिशत संभावना के साथ बादल गरजने और हल्की बारिश होने के आसार हैं.
- आगामी दिन: शुक्रवार को भी 20-30 प्रतिशत हल्की बारिश की संभावना है, जबकि शनिवार और रविवार को गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. सोमवार से तापमान में हल्की गिरावट आने का अनुमान है.
वर्तमान में जिले की वायु गुणवत्ता (AQI) 39 दर्ज की गई है, जो अच्छी श्रेणी में है. वहीं, प्रशासन गंगा के तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति पर भी लगातार नजर बनाए हुए है. कृषि विभाग ने किसानों को फिलहाल वैकल्पिक सिंचाई साधनों का उपयोग करने और खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान देने की सलाह दी है.
