– आदेश जारी कर चार दर्जन से अधिक अधिकारियों को दी हिदायत कटिहार आसन्न विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल या प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने वाले सरकारी अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. नगर निगम के छह कर्मियों को किसी खास दल के प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार के साक्ष्य पाये जाने के बाद जिला पदाधिकारी ने चार दर्जन से अधिक पदाधिकारी को इस आशय से संबंधित आदेश जारी कर निर्देशित किया है. डीएम की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि बिहार विधान सभा आम निर्वाचन में आदर्श आचार संहिता दिनांक 06-10-2025 से लागू है. जिसमें सरकारी सेवकों के आचरण एवं कर्त्तव्य का प्रावधान है. मुख्य प्रावधानों में जबतक निर्वाचन समाप्त नहीं हो जाता है तबतक कोई भी सरकारी सेवक विधि-व्यवस्था बनाये रखने के लिए तथा कार्यवाही रिपोर्ट देने के लिए जहां आवश्यक हो वहां छोड़कर किसी गैर सरकारी व्यक्ति द्वारा आयोजित जनसभा में उपस्थित नहीं होंगे. जन सम्पर्क विभाग भी ऊपर उल्लेखित अपवादों के सिवाय अपनी गाड़ी का प्रयोग निर्वाचन संबंधी कार्य में नहीं करने देंगे अथवा सार्वजनिक सभाओं में प्रयोग के लिए अपने लाउडस्पीकर को नहीं देंगे. डीएम की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम चार की उपधारा (4) में ऐसा प्रावधान है कि निर्वाचन में सरकारी सेवक प्रचार नहीं करेंगे अथवा हस्तक्षेप नहीं करेंगे या अन्यथा अपने।प्रभाव का प्रयोग नहीं करेंगे या निर्वाचन में भाग नहीं लेंगे. जो सरकारी सेवक मतदान देने के लिए योग्य है. वह अपने मताधिकार प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र है. पर यदि वह ऐसा करता है तो वह इसका आभास नहीं देगा कि वह किस प्रकार अपने मत का प्रयोग करना चाहता है या कर चुका है. सरकारी सेवकों का राजनीतिक सभाओं में भाग लेना निशिद्ध है. सिवाय ऐसे सरकारी सेवकों के जो कर्तव्यस्थ हो. आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम चार में विदित है कि कोई भी सरकारी सेवक किसी ऐसे राजनीतिक दल अथवा संगठन का सदस्य नहीं होगा अथवा उससे सम्बद्ध नहीं होगा. जो राजनीति में भाग लेता हो. साथ ही वह किसी राजनीतिक आंदोलन के कार्य कलाप में भाग नहीं लेंगे. चंदा नहीं देंगे एवं उनकी किसी प्रकार की सहायता नहीं करेंगे. जाहिर है कि निर्वाचन निधि में चंदा देना अथवा ऐसी निधि जमा करने के संबंध में किसी तरह की सहायता करना इस नियम का उल्लंघन होगा. चुनाव में एजेंट बनने पर कार्रवाई डीएम की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि निर्वाचन के संबंध में सरकारी सेवक को न केवल निश्पक्ष होना चाहिए. बल्कि ऐसा भी होना चाहिए कि दुसरे भी उससे ऐसा समझे। लोक जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 134 ए में सरकारी सेवकों के निर्वाचन एजेन्ट, मतदान एजेन्ट आदि होने पर प्रतिबंध लगाया गया है. यदि सरकारी सेवा में कार्यरत कोई व्यक्ति किसी उम्मीदवार के निर्वाचन एजेंट, मतदान एजेंट या मतगणना एजेंट के रूप में कार्य करेंगे तो वह तीन महीने तक के कारावास या जुर्माना या दोनों दण्ड पाने के भागी होंगे. निर्वाचन समाप्त होने तक सरकारी सेवक, जो निर्वाचन क्षेत्र के संचालन और प्रबंध से सम्बंद्ध हो. किसी व्यक्ति का अतिथ्य स्वीकार नहीं करेंगे. बिना भाड़े के किसी व्यक्ति का मकान इस्तेमाल नहीं करेंगे अथवा निर्वाचन लड़ने वाले किसी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करेंगे. किसी भी सरकारी सेवक का जिसे आगामी निर्वाचन के सिलसिले में कोई कर्तव्य सौंपा गया है. उसे जिले में वास्तविक मतदान अवधि के दौरान छुट्टी नहीं दी जायेगी. बहुत अपवादिक कारण होने पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी की सहमति प्राप्त करना अत्यावश्यक होगा. नगर निगम के आधा दर्जन कर्मियों पर गिरी है गाज डीएम के आदेश के अनुसार वर्तमान में उपरोक्त नियमों के उल्लंघन के कारण नगर निगम कटिहार द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कुल छह कर्मियों के द्वारा विशेष राजनीतिक दल के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार-प्रसार एवं सोशल मीडिया के पोस्ट फॉरवर्ड व शेयर किये जाने के कारण संबंधित कर्मियों को आदर्श आचार संहिता के नियमों का उल्लंघन के कारण दोषी पाया गया है. जिसके फलस्वरूप उक्त कर्मियों की सेवा नगर निगम कटिहार से समाप्त करते हुए आउटसोर्सिंग एजेंसी को वापस कर दी गयी है. इस संदर्भ में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के साक्ष्य पाये जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की बाध्यता होगी. सभी तरह के अधिकारियों व कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि बिहार विधान सभा आम निर्वाचन की सूचिता, पवित्रता एवं निष्पक्ष, पारदर्शिता को कायम रखने के लिए आदर्श आचार संहिता के उपरोक्त नियमों व शर्तों का पालन स्वयं व अधीनस्थ कर्मियों द्वारा सुनिश्चित की जाय.
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