कटिहार जिले के कदवा प्रखंड क्षेत्र में पिछले कई दिनों से जारी उमस भरी गर्मी और चिलचिलाती धूप के बाद गुरुवार को हुई झमाझम बारिश ने मौसम को खुशनुमा बना दिया है. बारिश होने से जहां आम लोगों ने तीखी गर्मी और उमस से राहत की सांस ली है, वहीं खेती-किसानी के लिहाज से भी इस बारिश को वरदान माना जा रहा है.
धान और मक्के की फसल को मिली नई संजीवनी
कदवा प्रखंड क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि प्रधान इलाका है, जहां की मुख्य फसलें धान और मक्का हैं. धान की खेती के लिए खेतों में पर्याप्त पानी और नमी की अत्यधिक आवश्यकता होती है. पिछले कुछ दिनों से बारिश न होने के कारण खेत सूखने लगे थे और किसानों को पटवन (सिंचाई) का सहारा लेना पड़ रहा था.
इस बारिश से:
- पटवन के खर्च से राहत: बारिश होने से किसानों को पटवन के डीजल और बिजली खर्च से बड़ी राहत मिली है.
- फसल की बेहतर ग्रोथ: रोपे गए धान के पौधों को प्रचुर मात्रा में नमी मिलने से उनकी बढ़त तेजी से होगी.
कदवा के जनजीवन में धान का महत्व
कदवा के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लगभग हर परिवार धान की खेती से जुड़ा हुआ है. क्षेत्र के मजदूर वर्ग और आम लोगों का मुख्य भोजन भात (चावल) ही है.
- साल भर के अनाज का इंतजाम: भू-स्वामी किसान साल भर के खाने के लिए अपने घरों में धान का स्टॉक रखते हैं.
- मजदूर वर्ग को संबल: वहीं मजदूरी करने वाले परिवार भी धान कटनी (फसल की कटाई) के समय मेहनत मजदूरी कर साल भर के राशन का प्रबंध कर लेते हैं.
बाढ़ के डर के बीच अच्छी पैदावार की उम्मीद
उल्लेखनीय है कि कदवा प्रखंड ऐतिहासिक रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र रहा है. पूर्व के वर्षों में जैसे ही किसान धान की रोपनी करते थे, नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी फसलों को पूरी तरह डूबोकर बर्बाद कर देता था. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से स्लूइस गेट/बांध खुले रहने और बेहतर जल प्रबंधन के कारण बाढ़ से फसलों को भारी नुकसान नहीं पहुंचा है.
बारिश के बाद अब क्षेत्र के किसानों में उम्मीद जगी है कि इस बार मानसूनी बारिश अनुकूल रहेगी और धान की बंपर पैदावार होगी.
