कटिहार के कदवा से अर्चना राय की रिपोर्ट
Kumhari Bazar Waterlogging: कटिहार जिले के कदवा प्रखंड क्षेत्र से जलजमाव और जर्जर बुनियादी ढांचे की एक बेहद विकट तस्वीर सामने आई है. प्रखंड के सबसे व्यस्त और मुख्य व्यावसायिक केंद्र ‘कुम्हड़ी बाजार’ में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश के बाद जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. पूर्णिया-सोनैली पथ पर स्थित इस बाजार की मुख्य सड़क के दोनों किनारों पर भारी जलजमाव और कीचड़ की मोटी परत जम गई है. इस नारकीय स्थिति के कारण बाजार में आम लोगों और वाहनों की आवाजाही पर लगभग विराम सा लग गया है. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह बदहाल सड़क प्रखंड मुख्यालय और थाना मुख्यालय के बिल्कुल समीप है, इसके बावजूद प्रशासन इस गंभीर समस्या से आंखें मूंदे बैठा है.
रोजाना गुजरते हैं सैकड़ों वाहन, बाइक सवार हो रहे चोटिल
कुम्हड़ी बाजार की इस बदहाल सड़क के कारण हो रही व्यावहारिक दिक्कतों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
- हादसों को न्योता: मुख्य मार्ग होने के कारण यहाँ से रोजाना सैकड़ों दो पहिया और चार पहिया वाहन गुजरते हैं. लेकिन सड़क पर फैले घुटने भर कीचड़ और गंदे पानी के कारण वाहनों के फिसलने का खतरा हर वक्त बना रहता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, संतुलन बिगड़ने से कई बाइक सवार गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं.
- मासूम और बुजुर्ग बेहाल: थोड़ी सी बारिश होते ही पूरी सड़क तालाब का रूप अख्तियार कर लेती है. इस वजह से स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे, इलाज के लिए अस्पताल जाने वाले मरीज और बुजुर्गों को इसी बदबूदार कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है.
ग्राहकों ने बनाई दूरी, व्यापारियों का धंधा हुआ मंदा
व्यापारियों का छला दर्द: कुम्हड़ी बाजार के स्थानीय दुकानदारों और व्यवसायियों का कहना है कि जलजमाव की वजह से अब ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहक बाजार आने से कतराने लगे हैं. सड़क पर पैर रखने की जगह न होने के कारण दुकानों की बिक्री 50% से अधिक घट गई है, जिससे उनके व्यापार और रोजी-रो रोटी पर सीधा संकट मंडराने लगा है.
प्रशासन और PWD के खिलाफ फूटा जनता का आक्रोश
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और पीड़ित दुकानदारों ने प्रखंड प्रशासन सहित लोक निर्माण विभाग (PWD) से अविलंब इस मार्ग पर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था करने और सड़क से कीचड़ साफ करवाने की पुरजोर मांग की है. लोगों का कहना है कि प्रखंड और थाना मुख्यालय के ठीक नाक के नीचे ऐसी नारकीय स्थिति होना प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा है. यदि जल्द ही इस सड़क को मोटरेबल (आवागमन योग्य) नहीं बनाया गया और नाले का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो स्थानीय लोग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
