कटिहार राज्य सरकार ने इस साल सभी जिलों में वसंत पंचमी महोत्सव के आयोजन को लेकर दिशा निर्देश जारी किया था. वसंत पंचमी के आसपास यह महोत्सव राज्य के अधिकांश जिलों में संपन्न हो चुका है. कटिहार में इस महोत्सव का आयोजन रविवार की शाम को हुआ. कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से स्थानीय टाउन हॉल में वसंत महोत्सव के नाम से आयोजन हुआ. वसंत पंचमी समाप्त हो चुकी है. वसंत पंचमी महोत्सव बजाय इस महोत्सव का नाम वसंत महोत्सव रखा गया. पर इस महोत्सव को लेकर अधिक प्रचार प्रसार नहीं होने की वजह से टाउन हॉल की अधिकांश कुर्सियां खाली रह गयी. यहां तक की जिला प्रशासन की ओर से महोत्सव को लेकर किसी तरह की जानकारी मीडिया कर्मियों एवं प्रेस को भी नहीं दी गयी. स्थानीय कलाकारों एवं रंगकर्मियों ने क्षोभ प्रकट करते हुए कहा, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग व जिला प्रशासन की ओर से आयोजित होने वाले ऐसे महोत्सव को लेकर स्थानीय कलाकारों की हमेशा उपेक्षा होती रही है. ऐसे कलाकारों का कहना है कि राज्य सरकार वसंत पंचमी महोत्सव के जरिये आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर व लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य ऐसे आयोजन करती है. पर स्थानीय प्रशासन की ओर से महोत्सव के नाम पर न सिर्फ खानापूर्ति की जाती है. बल्कि ऐसे महोत्सव सरकारी रस्म अदायगी बनकर रह जाती है. ऐसे आयोजनों से लोक कलाकार व आम लोगों का जुड़ाव नहीं हो पाता है. उल्लेखनीय है कि इस वसंत महोत्सव का उद्घाटन पूर्व उप मुख्यमंत्री सह सदर विधायक तारकिशोर प्रसाद ने किया है. जन प्रतिनिधियों की रहती है उदासीनता ————————————————- पिछले वर्ष से कटिहार में राज्य सरकार की ओर से कटिहार महोत्सव का भी आयोजन होता रहा है. इस साल से वसंत महोत्सव की शुरुआत हुई है. पर ऐसे आयोजनों से पूर्व कई तरह की तैयारी होती रही है. तैयारी से संबंधित जानकारी मीडिया के जरिये अमलोगों तक पहुंचती रही है. पर वसंत महोत्सव की तैयारी को लेकर किसी तरह की जानकारी मीडिया से साझा नहीं किया गया. दूसरी तरफ पिछले वर्ष कटिहार महोत्सव के आयोजन को लेकर भी ऐसा ही हुआ था. कटिहार महोत्सव के नाम पर तामझाम खूब हुआ था. पर स्थानीय कलाकारों का जुड़ाव काफी कम ही देखा गया था. इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल के नेताओं की ओर से भी उदासीनता रहती है. यही वजह है कि राज्य सरकार के दिशा निर्देश पर होने वाले महोत्सव महज खानापूर्ति बनकर रह जाती है. अगर यही स्थिति रहा तो स्थानीय स्तर पर कला संस्कृति को किस तरह संरक्षित किया जायेगा व बढ़ावा दिया जा सकता है. जबकि जिले में कई तरह की लोक संस्कृति प्रचलित है. जिले में अंगिका, मैथिली, भोजपुरी, संथाली, बागली सहित कई भाषाओं में लोकगीत, लोक नृत्य, लोक नाटक सहित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक लोक कला प्रसिद्ध है. स्थानीय स्तर पर नहीं मिलती सूचना: मनोज —————————————————— भारतीय जन नाट्य संघ के जिला कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार ने संदर्भ में कहा कि जिला प्रशासन की ओर से कला संस्कृति से संबंधित होने वाली गतिविधियों में स्थानीय सांस्कृतिक संगठन की भागीदारी नहीं के बराबर होती है. कटिहार महोत्सव हो या बसंत महोत्सव, इसको लेकर भी स्थानीय कलाकारों या सांस्कृतिक संगठनों को कोई सूचना नहीं मिलती है. कहती है कला-संस्कृति पदाधिकारी —————————————— जिला कला संस्कृति पदाधिकारी रीना गुप्ता ने कहा कि आयोजन को लेकर कुछ औपचारिकताएं पूरी करने में विलंब हुआ है. जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी के माध्यम से मीडिया को आयोजन से संबंधित सूचना दी जानी थी. आगे जो भी आयोजन होगा, उसे बेहतर तरीके से किया जायेगा.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
