कोढ़ा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में खरीफ सीजन की समाप्ति के बाद अब किसान रबी फसल की तैयारी में जुट गये हैं. इस बार विशेष रूप से केला की खेती करने वाले कई किसानों ने परंपरागत तरीकों से हटकर मिश्रित खेती को अपनाया है. किसानों ने अपने केले के खेतों में मक्का की बुवाई शुरू कर दी है. किसान अपने खेतों को कृषि यंत्र के द्वारा पूरी तरह जुट गए हैं. इससे न केवल भूमि का अधिकतम उपयोग हो रहा है. बल्कि दोनों फसलों से आय बढ़ाने की उम्मीद भी की जा रही है. खेती-किसानी से जुड़े जानकारों का कहना है कि केला और मक्का की मिश्रित खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है. कीट-रोगों का प्रकोप भी कम होता है. किसान इसे लाभदायक प्रयोग मान रहे हैं. स्थानीय किसान अमलेश कुमार, दीपक कुमार, शिवनाथ सिंह ने बताया कि, हमने इस बार केले के खेत में मक्का लगाने का निर्णय लिया है. इससे खेत खाली भी नहीं रहेगा और दोहरी आमदनी की संभावना भी है. कृषि विभाग ने भी किसानों को इस तरह की मिश्रित खेती के लिए प्रोत्साहित किया है. तकनीकी सहायता देने की बात कही है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
